भोपाल, 22 जुलाई 2026: मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी संगठनों और राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने विभाग पर नियमों के विरुद्ध जाकर पदोन्नति रोकने का आरोप लगाया है। मुख्य विवाद सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत होने के लिए सी.पी.सी.टी. (CPCT) परीक्षा उत्तीर्ण करने की समयसीमा को लेकर है।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र (01.04.2003) में स्पष्ट प्रावधान है कि भृत्य या समकक्ष पदों से सहायक ग्रेड-3 पर पदोन्नत होने वाले शासकीय सेवकों को पदोन्नति आदेश जारी होने के दिनांक से 02 वर्ष के भीतर सी.पी.सी.टी. परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। हालांकि, आरोप है कि पीएचई विभाग इन कर्मचारियों को पदोन्नति देने से पहले ही परीक्षा उत्तीर्ण करने का दबाव बना रहा है, जो कि स्थापित नियमों के विरुद्ध है।
कर्मचारी संगठनों में व्यापक रोष
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और शासकीय/अर्द्धशासकीय वाहन चालक यांत्रिक कर्मचारी कल्याण संघ ने इस मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि शासन के अन्य विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नत करते हुए उन्हें निर्धारित समय-अवधि प्रदान की जा रही है, लेकिन पीएचई विभाग में इस प्रक्रिया को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है। कर्मचारियों में इस "विभागीय लेटलतीफी" और भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे माननीय न्यायालय की शरण में जाने के लिए बाध्य होंगे।
अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी कल्याण समिति का हस्तक्षेप
मामले की गंभीरता को देखते हुए, मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चन्द्र शर्मा ने विभाग के प्रमुख सचिव और मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि अधीनस्थ कार्यालयों को निर्देशित किया जाए कि वे सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों का पालन करते हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत करने की कार्रवाई करें।
विभाग की स्थिति
वहीं, विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय ने इस संबंध में शासन से मार्गदर्शन मांगा है। विभाग इस उलझन में है कि क्या पदोन्नति से पूर्व परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है या पदोन्नति के उपरांत इसके लिए समय दिया जा सकता है। वर्तमान में, पदोन्नति की आस लगाए बैठे सैंकड़ों कर्मचारी शासन के स्पष्ट आदेश और न्यायोचित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी।

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