Trademark Ruling विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट का डिसीजन, व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर - ZARA vs ZORA Case

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 16 जुलाई 2026:
यह समाचार भारत के सभी व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रेडमार्क को लेकर आपके जीवन में या तो कोई विवाद आ चुका होगा या फिर भविष्य में आने वाला होगा। इसलिए जानना जरूरी है कि, न्यायालय इस मामले में क्या करते हैं। Delhi High Court ने स्पेनिश फैशन दिग्गज ZARA के पक्ष में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए, एक स्थानीय कपड़ा व्यापारी के ट्रेडमार्क 'ZORA' के पंजीकरण को रद्द कर दिया है। 

Delhi High Court's Trademark Ruling Every Business Owner Should Know

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने 'इंडीटेक्स' (Inditex), जो ज़ारा ब्रांड की मालिक है, द्वारा दायर अपील को स्वीकार किया और रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेड मार्क्स के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें सदर बाजार स्थित एक व्यापारी को क्लास 24 के तहत 'ZORA' नाम रजिस्टर करने की अनुमति दी गई थी। न्यायालय ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर ट्रेडमार्क रजिस्टर से 'ZORA' की प्रविष्टि को हटा दें ताकि 'Register की शुद्धता' (purity of the Register) बनी रहे। 

Phonetic and Visual Similarity between ZARA and ZORA Trademarks

इस मामले में मुख्य विवाद phonetic and visual similarity को लेकर था। इंडीटेक्स ने तर्क दिया कि रजिस्ट्रार ने दोनों शब्दों को उनके उपसर्ग (prefixes) 'ZA' और 'ZO' में विभाजित (dissect) करके गलत परीक्षण किया था। Anti-dissection rule का हवाला देते हुए, अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी ट्रेडमार्क की तुलना एक संपूर्ण इकाई (as a whole) के रूप में की जानी चाहिए। न्यायालय ने पाया कि ZARA और ZORA, दोनों चार अक्षरों वाले शब्द हैं जिनकी व्यंजन संरचना (consonant structure) और अंतिम ध्वनि समान है, और इनमें केवल एक स्वर (vowel) का अंतर है। कोर्ट के अनुसार, एक औसत बुद्धि वाले उपभोक्ता (consumer of average intelligence) के लिए यह मामूली अंतर भ्रम पैदा करने के लिए पर्याप्त है।

Well-known Trademark Protection under Section 11(2) of Trade Marks Act 1999

इस केस का एक महत्वपूर्ण पहलू 'Well-known Trademark' की सुरक्षा से जुड़ा है। प्रतिवादी (व्यापारी) का तर्क था कि ZARA को औपचारिक रूप से 'well-known' घोषित नहीं किया गया है। हालांकि, जस्टिस ज्योति सिंह ने स्पष्ट किया कि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 11(2) के तहत सुरक्षा प्राप्त करने के लिए किसी मार्क का न्यायालय या रजिस्ट्रार द्वारा औपचारिक रूप से घोषित होना अनिवार्य नहीं है। यदि कोई मार्क संबंधित जनता के बीच व्यापक प्रतिष्ठा (immense and extensive reputation) रखता है, तो वह सुरक्षा का हकदार है। ज़ारा की वैश्विक उपस्थिति, भारत में 1993 से पंजीकरण, और भारी बिक्री व विज्ञापन खर्च को देखते हुए, अदालत ने इसे एक प्रतिष्ठित ब्रांड माना जो dissimilar goods (असंबंधित वस्तुओं) के खिलाफ भी सुरक्षा का हकदार है।

Trademark Dilution and Dishonest Adoption of ZORA Brand Name

अदालत ने 'Doctrine of Dilution' पर जोर देते हुए कहा कि भले ही व्यापारी का व्यवसाय (पॉलिएस्टर फैब्रिक) ज़ारा के मुख्य फैशन व्यवसाय से अलग हो, लेकिन एक समान नाम का उपयोग ज़ारा की विशिष्ट पहचान को धुंधला (blurring) कर सकता है। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि ZORA मार्क अपनाने के बाद व्यापारी की बिक्री में अचानक और भारी वृद्धि हुई थी (लगभग 2.45 करोड़ से बढ़कर 31.34 करोड़ रुपये), जो ज़ारा की सद्भावना (goodwill) का अनुचित लाभ उठाने के इरादे को दर्शाता है। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि 'ZORA' का उपयोग न केवल ज़ारा की साख को नुकसान पहुँचाएगा, बल्कि उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाकर गुमराह भी कर सकता है कि इसका ब्रांड के साथ कोई व्यावसायिक संबंध (trade connection) है। 

Impact of High Court Verdict on Intellectual Property Rights in India

अंत में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने रजिस्ट्रार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि वास्तविक भ्रम (actual confusion) का कोई सबूत नहीं है। अदालत के अनुसार, धारा 11(2) के तहत मुख्य जांच reputation and distinctiveness की सुरक्षा पर केंद्रित होती है, न कि केवल उपभोक्ता भ्रम पर। यह निर्णय भारत में Intellectual Property Rights (बौद्धिक संपदा अधिकारों) को मजबूत करता है और स्थापित करता है कि प्रतिष्ठित वैश्विक ब्रांडों के ट्रेडमार्क की सुरक्षा के लिए कठोर मानकों का पालन किया जाना चाहिए। इस मामले में ज़ारा का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता सुशांत सिंह, सौरव पटनायक और पीयूष कुमार ने किया। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (विधि पत्रकार एवं सलाहकार)।

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