भोपाल, 22 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 22 जुलाई 2026 को दिल्ली छात्र आंदोलन को लेकर काफी हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्टी की ओर से स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया परंतु नियम के अनुसार नहीं था इसलिए खारिज हो गया। विरोध में कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने सदन में हंगामा किया और बाद में वॉक आउट कर गए। इसके अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
दिल्ली छात्र आंदोलन पर स्थगन प्रस्ताव खारिज क्यों - VIDEO
जल जीवन मिशन और मनरेगा के क्रियान्वयन संबंधी CAG की रिपोर्ट
कार्यवाही के दौरान नीट (NEET) परीक्षा घोटाले और दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन पर लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने छात्रों के अपमान का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन (Walkout) किया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित भी करना पड़ा। सत्र के दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रतिवेदन और ऑडिट रिपोर्ट भी पटल पर रखीं, जिनमें मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन और मनरेगा के क्रियान्वयन संबंधी कैग (CAG) की रिपोर्ट शामिल थी।
केन-बेतवा और चंबल सिंचाई परियोजना पर हंगामा
नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित पन्ना और छतरपुर जिलों के परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे में अनियमितता का आरोप लगाया। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि पन्ना के 1321 और छतरपुर के 3718 परिवारों को लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं और शिकायतों के आधार पर पुनः सर्वेक्षण (Fresh Survey) कराया गया है।
वहीं, विधायक श्री बाबू जंडेल ने चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (श्योपुर) में घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और पाइपलाइन फूटने का मुद्दा उठाया। राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि परियोजना अभी गारंटी अवधि में है और एजेंसी द्वारा रखरखाव का कार्य किया जा रहा है।
आदिवासियों की भूमि और राजस्व मामले
विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 170-ख के तहत आदिवासियों की भूमि के अवैध हस्तांतरण और उनकी बहाली पर प्रश्न किया। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने सदन को आश्वस्त किया कि आदिवासियों की भूमि पर अवैध कब्जे या बिना अनुमति रजिस्ट्री के मामलों में अनुविभागीय अधिकारी (SDO) को नामांतरण निरस्त करने और भूमि वापस दिलाने का पूर्ण अधिकार है।
महत्वपूर्ण विधेयक: निजी विश्वविद्यालय और पंचायत राज संशोधन
सदन में कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी संपन्न हुए:
उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने 'म.प्र. निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किया। विपक्ष ने विश्वविद्यालय खोलने के लिए भूमि की सीमा (25 एकड़) कम करने और छात्र सुरक्षा निधि पर सवाल उठाए, जिस पर मंत्री ने तर्क दिया कि शहरी क्षेत्रों में भूमि की कमी को देखते हुए यह सरलीकरण आवश्यक है।
पंचायत राज संशोधन विधेयक: पंचायत मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 'म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026' प्रस्तुत किया। चर्चा के दौरान विपक्ष ने पंचायतों के अधिकारों के विकेंद्रीकरण और अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क की कटौती पर आपत्ति जताई।
अतिथि शिक्षकों और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान के प्रश्न पर सरकार ने साफ किया कि अतिथि शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन जुलाई-अगस्त 2025 की तकनीकी समस्याओं के कारण रुके हुए वेतन का भुगतान उपस्थिति पंजी के आधार पर करने के निर्देश दिए गए हैं। विधायक श्री सोहनलाल वाल्मीकि ने परासिया के सिविल अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की पदस्थापना न होने पर ध्यान आकर्षित किया, जिस पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने निरंतर प्रक्रिया के तहत पदपूर्ति का आश्वासन दिया।
ई-अटेंडेंस प्रणाली: डेटा सुरक्षा और नेटवर्क की चुनौतियां
सदन की शुरुआत में विधायक श्री सुनील उईके ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस प्रणाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने शिक्षकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में उपस्थिति दर्ज करने में आने वाली समस्याओं पर सवाल किए। स्कूल शिक्षा मंत्री की ओर से मंत्री श्री विश्वास सारंग ने जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रणाली के लिए किसी निजी एजेंसी का चयन नहीं किया गया है, बल्कि यह भारत सरकार के उपक्रम NICSI द्वारा संचालित 'एजुकेशन पोर्टल 3.0' का हिस्सा है। सरकार ने दावा किया कि प्रदेश के 95.9 प्रतिशत नियमित शिक्षक और 95 प्रतिशत अतिथि शिक्षक इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं और जहाँ नेटवर्क की समस्या है, वहां फिजिकल रजिस्टर का विकल्प मौजूद है।

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