भोपाल, 22 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राजधानी की लाइफलाइन कही जाने वाली बस सेवा भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) की कार्यप्रणाली, बस ऑपरेटरों पर मनमाने दंड और बसों के गायब होने के गंभीर आरोपों ने सदन में भारी हंगामा खड़ा किया।
बिना नोटिस और सुनवाई के दंड पर सरकार का रुख
विधायक श्री चैन सिंह वरकडे ने प्रश्न उठाया कि क्या BCLL प्रबंधन किसी बस ऑपरेटर को बिना कारण बताओ नोटिस दिए या उसका पक्ष सुने सीधे पेनल्टी लगा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा पिछले 14 महीनों से ऑपरेटरों के विवरण और जवाब मांगने के प्रकरणों को टाला जा रहा है और उन्हें गुमराह किया जा रहा है। परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने लिखित जवाब में बताया कि मेसर्स कैपिटल रोडवेज एंड फाइनेंस प्रा. लि. द्वारा बसों का संचालन नहीं करने की स्थिति में उन पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार पेनल्टी अधिरोपित की गई है। सदन में इस विषय पर चर्चा करने के लिए विभागीय मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह उपस्थित नहीं थे। उनके स्थान पर खेल मंत्री श्री विश्वास सारंग ने आश्वासन दिया कि हालांकि कार्रवाई नियमों के तहत हुई है, फिर भी 'प्राकृतिक न्याय' (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन करते हुए बस ऑपरेटर को बुलाकर उसका पक्ष सुना जाएगा और उनकी शिकायतों का निराकरण किया जाएगा।
करोड़ों का घोटाला और 'लापता' बसें
विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल और श्री चैन सिंह वरकडे ने BCLL में हुए बड़े घोटालों की ओर ध्यान आकर्षित किया। यह आरोप लगाया गया कि NIT-41 के तहत संचालित 12 बसें बिना किसी कानूनी अनुमति के कर्नाटक (उडुपी) भेज दी गईं। इसके अतिरिक्त, NIT 121/122 के अंतर्गत 100 से अधिक बसों के डिपो से गायब होने की बात भी सामने आई है।
NIT-43 के तहत प्रति बस लागत ₹16.60 लाख होने के बावजूद ₹25 लाख मानकर भुगतान किया गया। इस प्रकार, निजी ऑपरेटरों को ₹1 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त और अवैध भुगतान करने का आरोप लगाया गया है। NIT-183 (ITMS प्रोजेक्ट) के लिए केंद्र सरकार (MoRTH) द्वारा जारी ₹2.38 करोड़ की राशि निर्धारित समय-सीमा में उपयोग न होने के कारण वापस ले ली गई है।
ऑडिट आपत्तियां और प्रशासनिक अनियमितताएं
सदन को बताया गया कि BCLL की सफल निविदाओं (जैसे NIT 41, 43, 121 आदि) में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और CAG/AG ऑडिट की आपत्तियां लंबित हैं। विधायक ने यह भी सवाल किया कि 'चलो मोबिलिटी' जैसी ब्लैकलिस्टेड कंपनियों पर बोर्ड की बैठकों में लिए गए निर्णयों का आधार क्या था।
प्रशासनिक स्तर पर यह भी आरोप लगा कि बोर्ड की महत्वपूर्ण और गोपनीय बैठकों में ऐसे संविदा कर्मचारियों को शामिल किया जा रहा है, जिनके विरुद्ध विभागीय जांच लंबित है (जैसे श्री रोहित यादव और श्री जीवान खान)। इसके अलावा, विधायक के पत्रों की उपेक्षा करने वाले CEO और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की गई।
महिलाओं और दिव्यांगजनों को छूट में कटौती
BCLL प्रबंधन पर यह भी आरोप लगा कि वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए अप्रैल 2020 के बाद से महिलाओं को बस पास में मिलने वाली छूट बंद कर दी गई है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों को UDID कार्ड दिखाने पर बस किराए में 50 प्रतिशत की छूट का प्रावधान अभी भी लागू है।
विधानसभा में हुई चर्चा और सरकार द्वारा जानकारी एकत्रित किए जाने के आश्वासनों से यह स्पष्ट है कि BCLL के भीतर वित्तीय प्रबंधन और बसों के भौतिक सत्यापन में भारी कमियां हैं। विपक्ष ने इन मामलों की लोकायुक्त या उच्च-स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है।

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