भोपाल समाचार, 17 जुलाई 2026: हालत इतनी लंबी हो गई है कि डॉक्टरों ने पत्रकारों से मदद मांगी है। लोगों में लगातार इन्फ्लूएंजा, कोविड-19 और एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं लेकिन भोपाल में जांच की सुविधा ही नहीं है इसलिए पता ही नहीं चल रहा कि बीमारी कौन सी है। MBBS-MD डॉक्टर्स, लक्षणों के आधार पर, अपने एक्सपीरियंस और नॉलेज के अनुसार इलाज कर रहे हैं। शुक्र है कि मामला अभी तक, मुक्ति धाम तक नहीं पहुंचा है।
केवल एम्स और सरकारी अस्पतालों में 10000 से ज्यादा मरीज
पिछले 10 दिनों में अस्पतालों की ओपीडी में तेज बुखार, गले में दर्द, सूखी खांसी और सांस संबंधी शिकायतों वाले मरीज लगातार बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीजों में इन्फ्लूएंजा, कोविड-19 और एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में फिलहाल कोविड-19 और एच1एन1 की नियमित जांच नहीं हो रही है। ऐसे में मरीजों का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है।बढ़ते संक्रमण का असर ओपीडी पर भी दिख रहा है। सोमवार को एम्स भोपाल की ओपीडी में 5,684 मरीजों ने पंजीयन कराया। इनमें बड़ी संख्या वायरल बुखार और श्वसन संबंधी संक्रमण के मरीजों की रही। हमीदिया अस्पताल की ओपीडी भी करीब तीन हजार मरीजों तक पहुंच गई है। डॉक्टरों के अनुसार पिछले 10 दिनों में ऐसे मरीज लगातार बढ़े हैं।
103 डिग्री तक तेज बुखार, 2-3 हफ्ते खांसी
गांधी मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा ने बताया कि इस बार कई मरीजों को अचानक 102 से 103 डिग्री तक बुखार आ रहा है। बुखार उतरने के बाद भी खांसी और गले की खराश दो से तीन हफ्ते तक बनी रहती है। इसे पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। कई मरीज लंबे समय तक कमजोरी और बदन दर्द की शिकायत भी कर रहे हैं।
नाक, गले और फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. यशवीर जेके के अनुसार संक्रमण सबसे पहले नाक और गले को प्रभावित कर रहा है। मरीजों में गले में तेज दर्द, निगलने में तकलीफ, आवाज बैठना, नाक बंद होना और लगातार सूखी खांसी की शिकायत अधिक मिल रही है। उन्होंने बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी।
गंभीर मरीजों को एक्स-रे और सीटी स्कैन की सलाह
रेस्पिरेटरी इंस्टीट्यूट, जीएमसी के डायरेक्टर डॉ. लोकेन्द्र दवे ने बताया कि मरीजों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका पर उन्हें एक्स-रे या सीटी स्कैन की सलाह दी जाती है। कई मामलों में फेफड़ों में संक्रमण भी दिखाई दे रहा है। जुलाई से अक्टूबर तक ऐसे संक्रमण अधिक सक्रिय रहते हैं। तेज बुखार तीन दिन से अधिक रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टरों से संपर्क करें
- 102-103 डिग्री तक तेज बुखार
- गले में दर्द और खराश
- लगातार सूखी खांसी
- नाक बंद या बहना
- आवाज बैठना
- सिर और बदन दर्द
- अत्यधिक कमजोरी
- कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ

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