भोपाल समाचार, 19 जुलाई 2026: शनिवार दिनांक 18 जुलाई को कुछ लोगों ने भोपाल में वर्षा की मनोकामना के साथ गधों को गुलाब जामुन खिलाया। और रविवार दिनांक 19 जुलाई को भोपाल के कुछ इलाकों में बारिश हो गई। क्षेत्रीय मान्यता है कि यदि गधों को गुलाब जामुन खिलाया जाए तो रूठा मानसून मान जाता है। इन मान्यताओं को इसलिए भी विश्वास मिल जाता है क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 16 जुलाई को वर्षा का दूसरा दौर शुरू हो जाना चाहिए था।
Bhopal Rains After Donkeys Were Fed Gulab Jamuns, Folk Ritual Sparks Buzz as Forecast Falls Flat
शनिवार को भोपाल शहर की सड़कों पर दो गधों को ढोल बजाते हुए घुमाया गया। साथ में कुछ लोग चल रहे थे जिनके हाथ में पोस्टर्स भी थे, जिस पर लिखा हुआ था, भटके हुए मानसून को वापस लाने के लिए और अच्छी बारिश के लिए ईश्वर से प्रार्थना। दरअसल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार इत्यादि राज्यों में यदि सामान्य से कम वर्षा होती है तो इस तरह के टोटकाओं का प्राचीन प्रचलन है। इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है लेकिन कई बार ऐसा कुछ होता है कि टोटका पर लोगों का विश्वास बन जाता है। जैसे कि भोपाल में, मौसम विभाग ने गुरुवार से वर्षा का दूसरा दौर शुरू हो जाने का पूर्वानुमान जारी किया था। शुक्रवार तक वर्षा नहीं हुई। शनिवार को गधों को गुलाब जामुन खिलाई गए और रविवार को वर्षा हो गई।
डिस्क्लेमर: हम किसी भी प्रकार की मान्यता को प्रमाणित नहीं कर रहे हैं बल्कि इस समाचार के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि, भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी मौसम का सटीक पूर्वानुमान जारी नहीं किया जा रहा। भोपाल में लोगों ने वैज्ञानिकों द्वारा जारी पूर्वानुमान पर विश्वास किया, लेकिन जब 16 और 17 जुलाई को बारिश नहीं हुई तब विश्वास टूटा और 18 जुलाई को भोपाल के लगभग 5 लाख किसानों में से सिर्फ चार किसानों ने गधों को गुलाब जामुन खिलौने वाला टोटका किया।
खाने का मतलब यह है कि यदि वैज्ञानिक अपना काम ठीक प्रकार से करें तो इस प्रकार की घटनाएं नहीं होगी।

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