भोपाल, 1 जुलाई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्से, कानपुर-कबरई एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। 7,145.14 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना भोपाल सहित समूचे मध्यप्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है।
Good News for Bhopal: Modi Cabinet Approves Kanpur–Kabarai Greenfield Highway
यह नई सड़क परियोजना केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर भोपाल के लिए कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय है। यह परियोजना भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का एक मुख्य खंड है, जो मध्यप्रदेश की राजधानी को उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से जोड़ेगी। इसके माध्यम से भोपाल और सागर जैसे शहरों की उत्तर प्रदेश के साथ कनेक्टिविटी और अधिक सुदृढ़ होगी।
भोपाल और मध्यप्रदेश को होने वाले प्रमुख फायदे:
निर्यात और व्यापार में सुगमता: यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश के विनिर्माण (Manufacturing), कृषि और खनिज संपन्न क्षेत्रों को उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक केंद्रों से सीधे जोड़ेगा। इससे भोपाल के आसपास के उद्योगों के लिए अपना माल उत्तर भारत के बाजारों तक पहुँचाना आसान और सस्ता हो जाएगा।
समय की बड़ी बचत: कानपुर और कबरई के बीच यात्रा का समय 3.5 घंटे से घटकर मात्र 1.5 घंटे रह जाएगा। इसका सीधा लाभ भोपाल से कानपुर की ओर जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों को मिलेगा, जिससे कुल यात्रा समय में भारी कमी आएगी।
लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर: यह कॉरिडोर खजुराहो हवाई अड्डे और महोबा, बांदा जैसे रेलवे स्टेशनों (लॉजिस्टिक्स नोड्स) के साथ बेहतर एकीकरण प्रदान करेगा, जिससे भोपाल क्षेत्र की लॉजिस्टिक्स दक्षता और सप्लाई चेन मजबूत होगी।
रोजगार के अवसर: इस पूरी परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ व्यक्ति-दिवसों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है, जिससे बुंदेलखंड और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।
पर्यटन को बढ़ावा: भोपाल से जुड़े इस कॉरिडोर के माध्यम से फतेहपुर, महोबा और खजुराहो जैसे सामाजिक और पर्यटन स्थलों तक पहुँच आसान हो जाएगी, जिससे मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
यह परियोजना पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए आर्थिक विकास को गति देना है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इसे 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (BOT) मोड पर लागू किया जाएगा। 80-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिज़ाइन किया गया यह कॉरिडोर भोपाल के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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