भोपाल, 11 जून 2026: ट्विशा शर्मा केस सीबीआई को सौंप दिया गया है लेकिन भोपाल पुलिस ने इस मामले की जांच करना बंद कर दिया है लेकिन भोपाल पुलिस के ऊपर लगे आप की डिपार्टमेंटल इंक्वारी चल रही है। सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा पर, पीड़ित पक्ष द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए थे। विभागीय जांच में आप सही पाए गए हैं और सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा को बड़ी विभाग की सजा दी गई है।
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के निर्देश पर हुई जांच में यह पाया गया कि एसआई ने शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) के समय अनिवार्य साक्ष्य एकत्र करने में लापरवाही बरती और फंदे की सामग्री (ligature) को सुरक्षित करने में दो दिन का विलंब किया। विभाग की छवि धूमिल होने और मृतका के परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस उपायुक्त विकास शाहवाल ने यह दंडात्मक कार्रवाई की है।
CBI अब नए सिरे से जांच करेगी
जांच का जिम्मा संभालने के बाद सीबीआई को अब दिल्ली एम्स से दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। Tvisha Sharma case AIIMS Delhi second autopsy report के आने के बाद सीबीआई के फोरेंसिक विशेषज्ञ पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं और इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं का मिलान पुराने साक्ष्यों से कर रहे हैं। केंद्रीय एजेंसी अब नए सिरे से गवाहों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच की तैयारी कर रही है, ताकि मौत के पीछे की असली साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।
पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की सीबीआई रिमांड होगी
इस मामले में मुख्य आरोपितों की स्थिति पर बात करें तो Giribala Singh and Samarth Singh CBI custody update यह है कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनका बेटा समर्थ सिंह वर्तमान में जेल में बंद हैं। सीबीआई इन दोनों को एक बार फिर रिमांड पर लेने की तैयारी में है ताकि एम्स की नई रिपोर्ट के आधार पर इनसे दोबारा कड़ी पूछताछ की जा सके।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया था, जबकि समर्थ सिंह को लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद हिरासत में लिया गया था।
Tvisha Sharma death case investigation Bhopal
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का पूरा घटनाक्रम और जांच की वर्तमान स्थिति को देखें तो 12 मई को त्विषा का शव फंदे से लटका मिलने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया था। परिजनों द्वारा न्याय की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शनों और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शव का दोबारा पोस्टमार्टम हुआ और मामला सीबीआई को सौंपा गया। एजेंसी ने घटनास्थल का सीन रीक्रिएशन भी किया है, लेकिन सीबीआई जांच के एक माह बाद भी मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है और जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

