इंदौर, 10 जून 2026: महिला एवं बाल विकास विभाग, इंदौर में संयुक्त संचालक के पद पर तैनात श्री लक्ष्मीनारायण कंडवाल के ठिकानों पर की गई छापेमारी में लोकायुक्त को अब तक 10 करोड़ से अधिक की संपत्ति का पता चल चुका है। अधिकारी की अब तक की टोटल कमाई लगभग 3 करोड़ है। मतलब 7 करोड़ की काली कमाई का पता चल चुका है, जबकि जांच जारी है।
आय से 286 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा
लोकायुक्त की अभी तक की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कंडवाल के पास उनकी वैध आय की तुलना में 286.7 प्रतिशत अधिक अनुपातहीन संपत्ति है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उनकी कुल ज्ञात आय 2.80 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से 2.50 करोड़ रुपये वेतन से और 30 लाख रुपये कृषि आय के रूप में दिखाए गए हैं। इसके विपरीत, उनके पास से बरामद कुल संपत्ति और व्यय का योग 10.82 करोड़ रुपये (10,82,73,089/-) से अधिक पाया गया है।
आलीशान घर, शॉपिंग मार्ट और जिम में निवेश
लोकायुक्त की टीमों ने कंडवाल के निवास स्थान, शॉपिंग मार्ट और बैंक लॉकर की सघन तलाशी ली। सर्चिंग के दौरान मिले संपत्ति के मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:
भूमि और भवन: लक्ष्मीनारायण कंडवाल ने अचल संपत्ति में भारी निवेश किया है। भूमि और भवन निर्माण पर लगभग 9.76 करोड़ रुपये (9,76,15,004/-) व्यय किए जाने का प्रमाण मिला है।
सोना और चांदी: उनके बैंक लॉकर से 24.76 लाख रुपये के आभूषण बरामद हुए हैं, जबकि घर की तलाशी में भी 4.89 लाख रुपये की ज्वेलरी मिली है।
व्यवसाय में निवेश: कंडवाल ने व्यापारिक गतिविधियों में भी बड़ी राशि लगाई है। उनके डिपार्टमेंटल स्टोर से 35.73 लाख रुपये की सामग्री मिली है, साथ ही उनके एक जिम में लगाए गए पंखे, लाइट और सेक्शन विंडो जैसे सामानों की कीमत लगभग 2.71 लाख रुपये आंकी गई है।
घरेलू विलासिता: कंडवाल के घर से प्राप्त सामानों की इन्वेंट्री ही लगभग 38.48 लाख रुपये की निकली है।
जांच जारी
लोकायुक्त पुलिस द्वारा की गई इस रेड ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विभाग अभी भी उनके अन्य निवेशों और बैंक खातों के विवरण खंगाल रहा है। यह मामला स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का संकेत देता है, जहाँ एक सरकारी सेवक ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है।

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