भोपाल के डॉ. अजय राव भ्रष्टाचार के मामले में निर्दोष घोषित, लोकायुक्त सबूत पेश नहीं कर पाई

Updesh Awasthee
भोपाल, 28 जून 2026:
टीवी अस्पताल में सफाई कर्मी भर्ती घोटाला मामले के आरोपी डॉक्टर अजय राव थेटे को न्यायालय द्वारा निर्दोष घोषित कर दिया गया है। साल 2016 में लोकायुक्त में शिकायत की जांच के आधार पर मामला दर्ज किया था। 3 साल तक इन्वेस्टिगेशन चली लेकिन लोकायुक्त पुलिस की टीम न्यायालय में डॉ अजय राव के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर पाई। 

डॉ अजय राव पर 2016 में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था

डॉ अजय राव, टीवी अस्पताल में अधीक्षक के पद पर थे। तब लोकायुक्त में शिकायत हुई कि उन्होंने ने दस्तावेजों में 73 सफाई एवं सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति बताई और उनका वेतन निकाला जबकि वास्तव में 10-12 कर्मचारी ही नियुक्त किए गए थे। मतलब अस्पताल में सफाई एवं सुरक्षा कर्मियों की फर्जी नियुक्ति की गई और उनका वेतन निकल गया। शिकायत में टोटल डेढ़ करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। मध्य प्रदेश में लोकायुक्त में एक निर्धारित प्रक्रिया है। प्राप्त शिकायत के आधार पर मामला दर्ज नहीं किया जाता, पहले शिकायत की जांच की जाती है। जांच में जब पर्याप्त सबूत मिल जाते हैं, तब मामला दर्ज किया जाता है और सबूतों को सूचीबद्ध करके सजा निर्धारित करने के लिए मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है। 

लोकायुक्त ने मामला दर्ज करके दाग गहरा कर दिया

सन 2016 में मामला दर्ज किया गया। आरोप लगाया गया था कि, वर्ष 2009 से 2016 के बीच यह घोटाला किया गया। लोकायुक्त द्वारा 2019 तक, मतलब 3 साल तक मामले की जांच की गई। फिर कोर्ट में चार्ज शीट नहीं बल्कि क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हमने गलत मामला दर्ज कर दिया था। जांच में भ्रष्टाचार का कोई प्रमाण नहीं मिला है। 

Bhopal's Dr Ajay Rao Acquitted in Corruption Case as Lokayukta Fails to Prove Charges

कोर्ट ने लोकायुक्त के द्वारा प्रस्तुत की गई क्लोजर रिपोर्ट को 2019 में स्वीकार नहीं किया। अब 2026 में, मतलब लगभग 7 साल बाद न्यायालय ने भी लोकायुक्त की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इस प्रकार डॉक्टर अजय राव निर्दोष घोषित कर दिए गए हैं। 

निष्कर्ष स्वरूप सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि लोकायुक्त ने एक ईमानदार डॉक्टर के खिलाफ 2016 में फर्जी मामला दर्ज किया। जिसके कारण 10 साल तक उन्हें दागी अधिकारी माना जाता रहा। समाज में उनके मान-सम्मान की हानि हुई और इस बात की भी संभावना है कि सरकारी स्तर पर उनको बहुत सारे लाभ इसलिए नहीं मिले क्योंकि उनके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा हुआ था। अब देखना यह है कि क्या डॉक्टर अजय राव, उनकी जिंदगी को 10 साल तक दागदार बनाने वाले लोकायुक्त और शिकायतकर्ता के खिलाफ अपने निर्धारित कानूनी अधिकार का उपयोग करेंगे या नहीं। 

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