Legal News - क्या विवाहित बेटी को अनुकंपा पर दुकान मिल सकती है, सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़िए

Updesh Awasthee
लीगल न्यूज डेस्क, 3 जून 2026:
सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति तो आपने सुनी होगी परंतु क्या उचित मूल्य की दुकान के मामले में, अथवा इस प्रकार की किसी भी उपक्रम के मामले में, विवाहित कन्या संतान को अनुकंपा के आधार पर दुकान अथवा इस प्रकार का कोई भी दूसरा उपक्रम संचालन के लिए मिल सकता है। यह प्रश्न सुप्रीम कोर्ट के समक्ष था और इस न्यूज़ रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बारे में विस्तार से बताया गया है। 

Can a Married Daughter Get a Compassionate Shop? SC Explains 

यह मामला "कुलसुम निशा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य" के नाम से डॉक्यूमेंट है। न्यायालय ने माना कि 'परिवार' की परिभाषा से विवाहित बेटियों को बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) का उल्लंघन है और यह लैंगिक रूढ़िवादिता पर आधारित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक स्थिति का निर्भरता या वित्तीय आवश्यकता से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह मानना गलत है कि विवाह के बाद बेटी अपने माता-पिता के परिवार का हिस्सा नहीं रहती या उन पर निर्भर नहीं हो सकती।

Purposive Construction 

न्यायालय ने 'उद्देश्यपूर्ण व्याख्या' के सिद्धांत का उपयोग करते हुए कहा कि सरकारी आदेशों में 'बेटी' शब्द के अंतर्गत 'विवाहित बेटी' भी शामिल मानी जानी चाहिए। विवाहित बेटी को दुकान का आवंटन तभी मिल सकता है जब वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करे:
  • वह मृतक डीलर पर पूरी तरह निर्भर रही हो।
  • वह उसी क्षेत्र की स्थानीय निवासी हो।
  • वह अन्य सभी आवश्यक योग्यताएं (जैसे आयु, शिक्षा, और अनापत्ति प्रमाण पत्र) पूरी करती हो।

इस मामले में, कुलसुम निशा को दुकान आवंटित करने का आदेश दिया गया क्योंकि वह अपनी मां की मृत्यु के बाद अपनी बहनों की देखभाल कर रही थी और शादी के बाद भी उसी गांव में रहकर अपनी मां की दुकान चलाने में मदद कर रही थी। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (पत्रकार एवं विधि सलाहकार)

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