भोपाल, 29 जून 2026: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल में इलाज तो वाकई बहुत अच्छा होता है लेकिन नर्सिंग और हाउसकीपिंग स्टाफ से ज्यादातर लोग परेशान है। आज भोपाल के अपर कलेक्टर का मामला सामने आया है। हमने सोचा अपर कलेक्टर मैनेजमेंट पर प्रेशर क्रिएट करने के लिए मीडियाबाजी कर रहे होंगे, लेकिन जैसे ही दरवाजे के अंदर एंट्री करी, पता चल गया कि अपर कलेक्टर क्या, AIIMS की डॉक्टर तक नर्सिंग और हाउसकीपिंग स्टाफ से परेशान हैं।
AIIMS Bhopal's Nursing and Housekeeping Staff Under Scrutiny Amid Growing Complaints
भोपाल के यहां पर कलेक्टर मनोज वर्मा का मामला तो आपको पता चल ही गया होगा। नहीं पता तो शॉर्ट में समझ लीजिए, AIIMS BHOPAL की डॉक्टर की सफलता की कहानियों को सुनकर उन्होंने अपनी सासू मां को चार्जेबल प्राइवेट वार्ड में भर्ती करवाया था। नर्सिंग और हाउसकीपिंग स्टाफ डायपर बदलने को तैयार नहीं। कहते हैं यह हमारा काम नहीं है। 2 घंटे तक गंदगी में पड़ी रही, बार-बार बुलाने के बाद भी कोई पॉटी साफ करने नहीं आया। मतलब समझ रहे हो ना, मरीज को टॉर्चर किया जा रहा है और मैनेजमेंट शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। कहते हैं यहां पर इलाज में कमी हो जाए तो डॉक्टर को सस्पेंड करवाया जा सकता है लेकिन यदि स्टाफ नर्स की शिकायत कर दी तो, शिकायत का तो कुछ नहीं होगा, आप इंजेक्शन और दवाई के लिए तरस जाओगे।
डिप्टी कलेक्टर क्या, डॉक्टर तक परेशान है
इस मामले में हमारा विचार था कि डिप्टी कलेक्टर, अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। हॉस्पिटल मैनेजमेंट पर प्रेशर क्रिएट करने के लिए मीडियाबाजी कर रहे हैं। असल में बात कुछ और होगी। जब हम पता लगाने के लिए अस्पताल पहुंचे तो, जिस डॉक्टर से हाथ मिलाया उसकी आंखों से उसका दर्द झलक उठा। दहशत का आलम यह है कि डॉक्टर ने शर्त रखी है कि मेरा नाम नहीं आना चाहिए। फिर बताया कि उसके परिवारजन के साथ भी ऐसा ही हो चुका है। वह अस्पताल में डॉक्टर है और उसके रिश्तेदार को हाउसकीपिंग के लिए रिश्वत देनी पड़ी। खुशी से इनाम देना एक बात होती है लेकिन यदि मजबूरी में देना पड़े तो बहुत गुस्सा आता है।
याद है? 3 साल के बच्चे को मार दिया था
दिसंबर 2025 की दुखद घटना की है, जिसकी न्यूज़ जून 2026 में वायरल हुई। 3 वर्षीय बच्चे सार्थक यादव (ब्लड कैंसर/ल्यूकेमिया का इलाज चल रहा था) की मौत हो गई थी। आरोप है कि नर्सिंग ऑफिसर ने IV लाइन में दवा/सलाइन की जगह फॉर्मेलिन (बायोप्सी सैंपल प्रिजर्व करने वाला जहरीला केमिकल) इंजेक्ट कर दिया। सिरिंज पर “F” मार्क था, जिसे इस्तेमाल कर लिया। बच्चे के पिता ने रोकने की कोशिश की, स्टाफ नर्स बिल्कुल नहीं मानी। बच्चे की मौत कुछ ही मिनटों में हो गई। AIIMS की आंतरिक जांच में नर्सिंग स्टाफ की gross negligence पाई गई। दो नर्सिंग ऑफिसर्स के खिलाफ, negligence से मौत और poisonous substance के mishandling के आरोप में, FIR दर्ज हुई।
इसके बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है। नर्सिंग स्टाफ और हाउसकीपिंग का रवैया अभी भी जैसे का तैसा है और मैरिज एवं उनके परिजनों की तो बात दूर, कई बार तो डॉक्टर तक के निर्देशों का पालन नहीं किया जाता। आप खुद सोचिए एक डिप्टी कलेक्टर, जिसके हाथ में पावर है, कितना मजबूर हो गया होगा कि पत्रकारों को बुलाकर बताना पड़ रहा है कि उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है।

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