ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 22 मई 2026: भारत में आजकल कॉकरोच काफी सुर्खियों में है। डेढ़ करोड़ से अधिक लोग खुद को कॉकरोच बोल चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसलिए यह बिल्कुल सही समय है जब यह भी जान लिया जाए कि कॉकरोच क्या है। पृथ्वी पर इनका अस्तित्व कब से है और सबसे बड़ी बात है कि पृथ्वी और मनुष्य के लिए कॉकरोच लाभदायक है या हानिकारक। इस एजुकेशनल ब्लॉग पोस्ट में, मैं आपको कॉकरोच के बारे में वह सारी जानकारी दूंगा, जिसके कारण आप अपनी सोसाइटी और सोशल मीडिया पर कुछ नया और अलग प्रस्तुत कर सकेंगे।
What Is a Cockroach? From Dinosaur Era to Your Kitchen, All Questions Answered
जीव विज्ञान के अनुसार कॉकरोच 'ब्लैटोडिया' (Blattodea) गण (Order) के कीट हैं। ये 'आर्थ्रोपोडा' संघ (Phylum) और 'इंसेक्टा' वर्ग (Class) का हिस्सा हैं। दुनिया भर में इनकी लगभग 4,600 से अधिक प्रजातियाँ मौजूद हैं, जिनमें से केवल 30 प्रजातियाँ ही मानव बस्तियों से जुड़ी हैं। मतलब पृथ्वी पर जितने कॉकरोच हैं, उनमें से मात्र 0.6521739% ही इंसानों के साथ रहना पसंद करते हैं।
कॉकरोच की उत्पत्ति और इतिहास
हम इंसान, कॉकरोच को देखते ही मार देते हैं। कॉकरोच को करने के लिए कुछ पदार्थ और उपकरण भी बाजार में मिलते हैं। मतलब सरकार भी कॉकरोच को मारने की अनुमति देता है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कॉकरोच की उत्पत्ति कार्बोनिफेरस काल (लगभग 325 मिलियन वर्ष पूर्व) हुई थी। शायद इससे पहले भी हो गई होगी लेकिन हमारे वैज्ञानिकों को जो जीवाश्म मिले हैं उसकी डेटिंग के हिसाब से पृथ्वी पर कॉकरोच का अस्तित्व लगभग 325 मिलियन वर्ष से है। इसका मतलब यह डायनासोर के लाखों साल पहले पृथ्वी पर थे और जब पृथ्वी पर जीवन का संकट आया, डायनासोर सहित हजारों प्रजातियां नष्ट हो गई, तब भी कॉकरोच जीवित रहे। मतलब इनमें कठिन से कठिन परिस्थिति में भी जीवित रहने की अद्भुत क्षमता है।
पृथ्वी के इकोसिस्टम में कॉकरोच का महत्व
कॉकरोच, प्रकृति के 'क्लीनर' का काम करते हैं। ये सड़ी-गली वनस्पतियों, मृत जीवों और जैविक कचरे को खाते हैं, जिससे पोषक तत्व वापस मिट्टी में मिल जाते हैं। इनका मल नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो पौधों की वृद्धि में खाद की तरह मदद करता है। मतलब कॉकरोच मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखते हैं। यदि कॉकरोच खत्म हो जाए तो मिट्टी में फर्टिलिटी की समस्या आ जाएगी।
कॉकरोच कई छोटे जीवों, जैसे कि पक्षियों, छिपकलियों और अन्य कीटों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं। यदि कॉकरोच खत्म हो गए तो पक्षियों और अन्य कई प्रकार की कीटों की प्रजातियां समाप्त हो जाएंगी। जैसे पिछले साल चीता ले गए थे वैसे खाद्य श्रृंखला को बनाए रखने के लिए कॉकरोच लाकर छोड़ने पड़ेंगे।
कॉकरोच की कुछ प्रजातियाँ उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फूलों के परागण (Pollination) में भी मदद करती हैं।
तो फिर लोग कॉकरोच को मारते क्यों हैं
केवल जर्मन और अमेरिकन कॉकरोच इंसानों के लिए हानिकारक होते हैं। ये गंदी जगहों पर घूमते हैं और अपने पैरों व शरीर के माध्यम से बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला और गैस्ट्रोएंटेराइटिस पैदा करने वाले कीटाणु) को हमारे भोजन और बर्तनों तक फैला सकते हैं। कॉकरोच के मल, लार और उनके मृत शरीर के टुकड़े (Exoskeleton) हवा में फैलकर एलर्जी और अस्थमा का कारण बन सकते हैं। बच्चों और सांस की समस्या वाले लोगों के लिए यह एक प्रमुख ट्रिगर हो सकता है। ये किताबें, कागज, वॉलपेपर पेस्ट और कपड़ों को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं।
कुलमिलाकर, पृथ्वी पर कॉकरोच का अस्तित्व इंसानों की तुलना में बहुत पुराना है। इनको हर परिस्थिति में जीवित रहना आता है इसलिए इनको खत्म नहीं किया जा सकता और सबसे बड़ी बात कॉकरोच की 4600 से अधिक प्रजातियों में से सिर्फ 30 प्रजातियां (0.6521739%) ही हानिकारक हैं। इनमें से भी ज्यादातर जर्मनी और अमेरिका में पैदा हुए। मतलब अमेरिका में पैदा हुए कॉकरोच दुनिया भर के लिए हानिकारक है।

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