भोपाल, 03 मई, 2026: यह Shubhra Ranjan IAS Study का मामला है। जो खुद को premier institute to prepare for civil services examinations in India held by UPSC बताती है। डायरेक्टर शुभ्रा रंजन को भोपाल में बंधक बनाया गया, लेकिन बंधक बनाने वाले कोई क्रिमिनल नहीं बल्कि इनकी अपनी फ्रेंचाइजी हैं। पहले पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज घटना का विवरण पढ़ते हैं फिर समझने की कोशिश करेंगे कि ऐसा क्या हुआ, जो एक कोचिंग संचालक को, अपनी ही कोचिंग की डायरेक्टर को बंधक बनाना पड़ा।
Shubhra Ranjan IAS Study Row: Director Allegedly Confined in Bhopal, Released After Payment
पुलिस के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने वाला कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसी संस्थान की फ्रेंचाइजी चलाने वाला युवक है। आरोपी भेल के एक रिटायर्ड अधिकारी का बेटा है। वह पहले दिल्ली में रहकर आईएएस कोचिंग के जरिए UPSC की तैयारी कर चुका है। डायरेक्टर शुभ्रा रंजन द्वारा पुलिस को की गई शिकायत के मुताबिक आरोपी ने भोपाल में कोचिंग की दूसरी ब्रांच खोलने और उस जगह का निरीक्षण कराने के बहाने उन्हें बुलाया। वह दिल्ली से भोपाल आई थीं। वह शहर के एक नामी होटल ताज में ठहरी थीं।
बुधवार को आरोपी प्रियंक शर्मा उन्हें होटल से 2-3 बजे के करीब अपने साथ ले गया। इसके बाद बागसेवनिया इलाके के एक फ्लैट में ले जाकर बंधक बना लिया। जान से मारने की धमकी दी। कनपटी पर पिस्टल रखी। जान बख्शने के एवज में अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए गए। पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने बताया कि प्रियंक पहले से IAS अकादमी की एक फ्रेंचाइजी चला रहा था। उसे अंदाजा था कि डायरेक्टर के पास पर्याप्त पैसा है, इसलिए उसने साजिश रची। उसने दतिया और कालापीपल में रहने वाले अपने साथियों को बुलाया।
शोर दबाने के लिए कराया सुंदरकांड
पुलिस कमिश्नर ने बताया- जिस फ्लैट में महिला डायरेक्टर को बंधक बनाया गया था, वहां वारदात वाले दिन सोमवार को सुंदरकांड का पाठ कराया गया। मकसद था कि पीड़िता शोर मचाए तो आवाज बाहर तक न पहुंचे। फ्लैट के एक कमरे में उन्हें 4 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया। पैसे मिलने के बाद बुधवार रात को उनकी रिहाई हुई। पुलिस ने सभी खातों में रकम होल्ड करा दी है, ताकि रकम सुरक्षित रहे।
एम्स के आईसीयू से मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस का कहना है कि, प्रियंक वारदात के बाद विदेश भागने की तैयारी में था। इसके लिए वह कई एजेंट्स के संपर्क में था। शिकायत के बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी। उसके रिश्तेदारों की निगरानी शुरू की। गिरफ्तारी के डर से वह एम्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हो गया।
क्राइम ब्रांच को भनक लगते ही टीम ने अस्पताल पहुंचकर आईसीयू से ही उसे गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उसकी मां और पत्नी ने गिरफ्तारी का विरोध किया, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई जारी रखते हुए उसे हिरासत में ले लिया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने अन्य 5 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।
आरोपियों की प्रोफाइल और भूमिका
प्रियंक शर्मा (पुलिस रिकॉर्ड में मास्टरमाइंड) भोपाल के अयोध्या बाइपास का रहने वाला है। पिता विष्णु शर्मा भेल के रिटायर्ड अधिकारी हैं। आरोपी प्रियंक बीए ग्रेजुएट है। कोचिंग सेंटर चलाता है। पहले यूपीएससी की तैयारी कर चुका है। इसी ने पूरी वारदात की साजिश रची। उसे अंजाम तक पहुंचाया।
दीपक भगत (ड्राइवर और करीबी सहयोगी) बागसेवनिया, भोपाल का निवासी है। वह आठवीं तक पढ़ा है और प्रियंक की कार चलाने के साथ उसके निजी काम देखता है। पुलिस की गिरफ्त में आते ही उसने मरने की एक्टिंग की, लेकिन ज्यादा देर नहीं चली और वह पकड़ा गया।
रोहित, पिता जगन्नाथ (सफाई कर्मचारी) कालापीपल का रहने वाला है। वह आठवीं तक पढ़ा है और प्रियंक के संस्थान में साफ-सफाई का काम करता था। वारदात के दौरान वह अन्य आरोपियों के साथ मास्क और हथियार लेकर फ्लैट में मौजूद था।
विकास उर्फ विक्की दाहिया (मास्टरमाइंड का सहयोगी) आठवीं कक्षा तक पढ़ा है। मार्केटिंग का काम करता है। पूरे घटनाक्रम के दौरान वह प्रियंक के साथ सक्रिय रूप से शामिल रहा और वारदात में अहम भूमिका निभाई।
कुनाल यादव दतिया का निवासी है, आठवीं तक पढ़ा है और मजदूरी करता है। उसे विक्की ने वारदात में शामिल होने के लिए बुलाया था। काम पूरा होने के बाद उसे पांच लाख रुपए देने का लालच दिया गया था।
पंकज अहिरवार दतिया का रहने वाला है। पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है। इसे भी विक्की ने वारदात में शामिल होने के लिए बुलाया था।
रामजी उर्फ निहाल प्रजापति और रामू उर्फ रामेश्वर उर्फ शिव फिलहाल फरार हैं। इन्हें भी विक्की ने वारदात में शामिल होने के एवज में पांच-पांच लाख रुपए का लालच देकर बुलाया था। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।
पुलिस की कहानी से पैदा हुए सवाल
इस पूरी कहानी से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि जो कुछ भी हुआ प्लानिंग के तहत हुआ, और पुलिस फाइल के हिसाब से जो मास्टरमाइंड है, वह शुभ्रा रंजन की फ्रेंचाइजी भी है। मतलब पहले से एक कोचिंग चल रहा है। पुलिस की कहानी से यह भी स्पष्ट होता है कि मास्टरमाइंड प्रियंक शर्मा का कोई पुराना क्राइम रिकॉर्ड नहीं है।
पुलिस का कहना है कि प्रियंक शर्मा विदेश फरार होना चाहता था, लेकिन पुलिस ने उसे एयरपोर्ट से नहीं बल्कि AIIMS BHOPAL के ICU से गिरफ्तार किया है। अब AIIMS BHOPAL कोई होटल तो नहीं है जो प्रियंक शर्मा ने ऑनलाइन बुकिंग करके ICU चेक इन कर लिया होगा। डॉक्टर ने जांच करने के बाद पाया होगा कि उसको ICU वार्ड में भर्ती करने की जरूरत है, इसलिए ही भर्ती किया गया होगा। इसका मतलब हुआ की घटना के बाद प्रियंक शर्मा की तबीयत खराब हो गई होगी। स्वाभाविक भी है क्योंकि प्रियंक शर्मा, पहले शुभ्रा रंजन का स्टूडेंट था और फिर शुभ्रा रंजन का फ्रेंचाइजी बना। वह क्रिमिनल नहीं है और उसके हाथ से क्राइम हो गया। तो घबराना और ब्लड प्रेशर बढ़ जाना सामान्य बात है।
दरअसल पुलिस की इस कहानी के पीछे एक और कहानी दिखाई देती है। यह फ्रेंचाइजी की लड़ाई है, जो भारतीय बाजार में आम हो गई है। फ्रेंचाइजी देने वाले, पहले तो कई सपने दिखाते हैं, और फिर जब सपने पूरे नहीं होते तो उनकी भाषा बदल जाती है। फ्रेंचाइजी पेपर पर जब साइन किए जाते हैं, तब फ्रेंचाइजी लेने वाला, फ्रेंचाइजी देने वाले के शब्दों पर भरोसा करता है। एग्रीमेंट पेपर पर क्या लिखा है, ज्यादा ध्यान से नहीं पढ़ता। बाद में जब खुद को ठगा हुआ महसूस करता है तो सबसे पहले कानूनी कार्रवाई का विचार करता है, लेकिन फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट के कारण वह कानूनी कार्रवाई नहीं कर पाता।
शायद इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ है इसलिए अपने पैसे वापस लेने की नीयत से प्रियंक शर्मा ने नई फ्रेंचाइजी का लालच देकर शुभ्रा रंजन को दिल्ली से भोपाल बुलाया, और फिर अपने फ्लैट में ले जाकर पैसे वापस मांगने के लिए प्रेशर क्रिएट किया। शुभ्रा रंजन ने बंधन से मुक्त होने के लिए पैसे वापस कर दिया और बाद में रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
इस मामले में कौन कितना सही है और कौन कितना गलत, इसका निर्धारण कभी नहीं हो पाएगा क्योंकि भारतीय न्याय संहिता के अनुसार किसी को बंधक बनाना अपराध है जबकि व्हाइट पेपर पर काले अक्षरों के साथ की गई धोखाधड़ी के खिलाफ तब कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती जब सामने वाले ने भी हस्ताक्षर कर दिए हों।
न्याय का सिद्धांत कहता है कि, प्रियंक शर्मा ने, यदि पुलिस द्वारा बताई गई कहानी के अनुसार वही सब कुछ किया है तो उसकी सजा मिलनी ही चाहिए परंतु वह एक पीड़ित भी है, इसलिए उसको फ्रेंचाइजी मामले में न्याय भी मिलना चाहिए और शुभ्रा रंजन को भी दंडित किया जाना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई प्रियंक रंजन धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद, अपराधी ना बन जाए।
डिस्क्लेमर: पुलिस की कहानी से पैदा हुए सवाल, केवल एक सवाल हैं। विश्वास पूर्वक नहीं कहा जा सकता कि वही सही है। हम इस मामले का मीडिया ट्रायल नहीं कर रहे हैं, जब पुलिस की चार्ज शीट पेश होगी और न्यायालय में प्रियंक रंजन का पक्ष रखा जाएगा, तब शायद पूरी कहानी का खुलासा हो सके। लेकिन सामान्य तौर पर ऐसा होता है, और इन सवालों का उद्देश्य केवल इतना ही कि, फ्रेंचाइजी के मामले में सरकार के कुछ नियम होने चाहिए। ताकि कोई भी किसी के साथ चीटिंग ना कर सके।

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