यूट्यूब चैनल पर एक शॉर्ट वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक व्यक्ति भागवत कथा के आचार्य श्री अनिरुद्ध आचार्य से प्रश्न कर रहा है कि जब माता सीता का स्वयंवर हुआ था तो रावण को निमंत्रण देने के लिए कौन गया था। उसका कहना है कि, जैसे एक व्यक्ति रावण पर निमंत्रण देने गया था, वैसे ही भगवान श्री राम भी जा सकते थे। श्री राम सेतु बनाने की क्या जरूरत थी। श्री अनिरुद्ध आचार्य ने तो इसका जवाब नहीं दिया लेकिन मैं इसका जवाब देता हूं। उम्मीद है प्रश्न करने वाले तक पहुंच जाएगा।
Who Invited Ravana to Sita’s Swayamvar? Ramayana Trivia Explained
वैसे तो भारत में सैकड़ो राम कथाएं प्रचलित है परंतु वाल्मीकि रामायण को सत्य के सबसे नजदीक और श्री रामचरितमानस को सर्वाधिक स्वीकार्य माना जाता है। दोनों ही पौराणिक कथाओं में स्पष्ट उल्लेख है कि माता-पिता के स्वयंवर में किसी भी राजा अथवा राजकुमार को आमंत्रण नहीं भेजा गया था। महाराजा जनक ने माता सीता के स्वयंवर की “राजकीय उद्घोषणा” की थी। उल्लेख मिलता है कि, इसकी चर्चा तीनों लोकों में थी। रावण समुद्र पार श्रीलंका में रहता था परंतु उसके गुप्तचर और उसके अधीन राज्य समुद्र के इस पर भारतवर्ष एवं पाताल लोक में भी थे। इसलिए यह चर्चा रावण तक भी पहुंची। क्योंकि रावण स्वयं को पृथ्वी पर सबसे बड़ा शिव भक्त मानता था और राजा जनक ने घोषणा की थी कि जो भी शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। इसलिए स्वयं को सबसे बड़ा शिव भक्त प्रमाणित करने के लिए रावण स्वयंवर में पहुंचा।
यहां रावण का उद्देश्य, माता सीता से विवाह करना नहीं था बल्कि वह एक अहंकार में डूबा हुआ था कि मैं कैलाश पर्वत को हिला चुका हूं और भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त हूं तो उनका धनुष में ही उठा सकता हूं। मैं ही इस पृथ्वी पर उत्तराधिकारी हूं। अपनी वीरता के प्रदर्शन और अहंकार की शांति के लिए रावण स्वयंवर में पहुंचा था। पौराणिक कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि, शुक या सारण को निमंत्रण देने के लिए भेजा गया था परंतु ज्यादातर राम कथाओं में राजकीय उद्घोषणा का ही उल्लेख मिलता है।
वाल्मीकि रामायण में स्पष्ट रूप से राजकीय उद्घोषणा का उल्लेख है और इस विषय को अधिक विस्तार नहीं दिया गया है। जबकि आध्यात्मिक रामायण में स्पष्ट रूप से लिखा है कि राजा जनक की प्रतिज्ञा सुनकर संसार भर के वीर और राजा वहाँ एकत्रित हुए थे।
इस प्रकार स्पष्ट होता है, माता जानकी के स्वयंवर के लिए कोई आमंत्रण निमंत्रण नहीं भेजा गए थे। यह एक सार्वजनिक राजकीय उद्घोषणा थी। अपनी वीरता का प्रदर्शन करने के लिए भारतवर्ष के वह सभी राजा और राजकुमार उपस्थित हुए थे जो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ वीर योद्धा मानते थे। यहां इस बात का उल्लेख करना भी जरूरी है कि सभी राजा उपस्थित नहीं हुए थे। यह सूचना राजा दशरथ तक भी पहुंची थी परंतु प्रभु श्री राम महल में नहीं थे, और राजा दशरथ अपनी आयु के कारण इस प्रतिस्पर्धा में शामिल होने की स्थिति में नहीं थे इसलिए अयोध्या से आधिकारिक तौर पर कोई नहीं गया था। श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल।

.webp)
