धार, 19 मई 2026: मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा में एक बार फिर भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। इंदौर लोकायुक्त की टीम ने धार जिला शिक्षा केंद्र के जिला परियोजना समन्वयक श्री प्रदीप कुमार खरे को भ्रष्टाचार में अपने हिस्से में से 1 लाख रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में एक सिस्टम का खुलासा हुआ है। जमीन अधिकारी भ्रष्टाचार की रकम का कलेक्शन करेगा और फिर वह अपने वरिष्ठ अधिकारी को देगा। इस प्रकार ऊपर से ऊपर पहुंचते हुए भ्रष्टाचार की रकम टॉप तक पहुंच जाएगी। इस प्रकार पूरी चैन का खुलासा हुआ है।
MP School Education Corruption Chain Exposed, Lokayukta Arrests DPC
लोकायुक्त द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आवेदक श्री दिलीप साधव पिता स्व. श्री मांगीलाल साधव, उम्र 41 वर्ष, पद प्रभारी सहायक यंत्री, जिला शिक्षा केन्द्र धार, निवासी 186 महालक्ष्मी नगर धार ने लोकायुक्त को अपनी शिकायत में बताया था कि, आरोपी प्रदीप कुमार खरे पिता स्व. श्री बी.एल. खरे, उम्र 57 वर्ष, पद जिला परियोजना समन्वयक, कार्यालय समग्र शिक्षा केन्द्र, जिला शिक्षा केन्द्र धार उनसे ₹100000 रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
श्री मांगीलाल ने बताया कि, समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत धार जिले में विभिन्न शासकीय विद्यालय परिसरों में 122 शौचालयों का निर्माण कराये जाने हेतु लगभग 3,42,00,000/- रुपये स्वीकृत हुये थे। उक्त शौचालयों का निर्माण वर्तमान में चल रहा है. जिनका सुपरविजन आवेदक द्वारा किया जा रहा है। उक्त निर्माणाधीन शौचालयों का कार्य पूर्ण होने के पूर्व ही श्री प्रदीप कुमार खरे द्वारा कार्य पूर्ण प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने के एवज में 5 प्रतिशत के मान से 17,00,000/- रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है।
Pradeep Kumar Khare, DPC of the Dhar District Education, arrested in a corruption case
श्री राजेश सहाय, पुलिस अधीक्षक, विपुस्था, लोकायुक्त कार्यालय इंदौर द्वारा शिकायत के सत्यापन की कार्रवाई की गई। सत्यापन में शिकायत सही पाये जाने पर आज दिनांक 18.05.2026 को ट्रैपदल का गठन किया गया और आरोपी प्रदीप कुमार खरे, जिला परियोजना समन्वयक, कार्यालय समग्र शिक्षा केन्द्र, जिला शिक्षा केन्द्र धार को आवेदक से रिश्वत राशि की प्रथम किश्त के रुप में 1,00,000/- रुपये रिश्वत राशि लेते हुये रंगे हाथो पकडा गया। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के अंतर्गत कार्यवाही जारी है।
ट्रैपदल में कार्यवाहक निरीक्षक श्री सचिन पटेरिया, कार्यवाहक प्रआर श्री आशीष शुक्ला, आरक्षक श्री विजय कुमार, आरक्षक श्री कमलेश परिहार, श्री मनीष माथुर, श्रीकष्णा अहिरवार, प्रभात मोरे शामिल थे।
ध्यान देने वाली बातें:-
यह मामला कोई सामान्य रिश्वतखोरी का मामला नहीं है जिसमें कोई अधिकारी आम जनता से रिश्वत ले रहा था। यह भ्रष्टाचार की चेन टूटने का मामला है। जरा सोचिए, 3.42 करोड़ के काम में 17 लाख मतलब 5% Share of Corruption की डिमांड, क्या बिना किसी संरक्षण के जिला परियोजना समन्वय कर सकता है। जरा यह भी सोचिए कि यदि उसको एक काम में 17 लाख की कमाई होती है तो फिर वह साल भर में कितना पैसा कमा लेगा? दरअसल यह भ्रष्टाचार की श्रृंखला है। ग्राउंड ऑफिसर भ्रष्टाचार करेगा और जिले के अधिकारी को देगा। जिले का अधिकारी डायरेक्ट राज्य के टॉप अधिकारी को देगा और राज्य का टॉप अधिकारी मंत्री तक पहुंचाएगा। जिले का अधिकारी ही लोकल के नेताओं और पत्रकारों को भी मैनेज करेगा। इस प्रकार ग्राउंड ऑफिसर द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को संरक्षित किया जाएगा और भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी के खिलाफ या तो कोई जांच ही नहीं होगी और यदि जांच होगी तो कार्रवाई नहीं होगी।
इंदौर में लोकायुक्त ऑफिस का एड्रेस और फोन नंबर
आमजन से अपील है कि कोई अधिकारी/कर्मचारी रिश्वत की मांग करे तो लोकायुक्त कार्यालय इंदौर एवं दूरभाष पर भी सम्पर्क कर सकते है। पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय इंदौर संभाग इंदौर पता- मोती बंगला, एम.जी. रोड इंदौर-452007
दूरभाष
0731-2533160
0731-2430100

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