जबलपुर कोर्ट का आदेश, क्रूज बोट स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज करो, पर्यटकों को मरता छोड़कर भाग गए थे

Updesh Awasthee
जबलपुर, 6 MAY 2026
: जिला न्यायालय से बड़ी खबर आई है। बरगी क्रूज बोट मामले में मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने क्रूज बोट स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय का कहना है कि, जो स्टाफ पर्यटकों को मरता हुआ छोड़कर भाग गया हो, उसको माफ नहीं करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि पायलट महेश पटेल ने बड़ा ही मार्मिक वीडियो जारी करके पीड़ित परिवारों से माफी मांगी थी। इस समाचार के बाद ही कोर्ट ने FIR का आदेश दिया।

MP News: Jabalpur Court Directs FIR on Cruise Staff Accused of Leaving Tourists to Die

न्यायालय-डी.पी. सूत्रकार, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जबलपुर द्वारा थाना प्रभारी को आदेशित किया गया है कि, जबलपुर जिले में प्रकाशित विभिन्न समाचार पत्र एवं सोशल मीडिया के माध्यम से न्यायालय के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि दिनांक 30.04.2026 को समय लगभग 5:30 बजे से 6:30 बजे के मध्य क्रूज बोट चालक द्वारा क्रूज को उपेक्षा पूर्वक चलाया गया, जिस कारण क्रूज डूबने के कारण कई व्यक्तियों की मृत्यु हुई। क्रूज चालक स्वयं क्रूज की गतिविधियों से परिचित होकर क्रूज में बैठे व्यक्तियों को डूबता हुआ छोड़कर सकुशल बच निकला। उसके द्वारा उन्हें बचाने हेतु कोई प्रयास न किया जाना धारा 106 भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा धारा 110 आपराधिक मानव वध करने के प्रयत्न को दर्शाता है। 

उक्त मामले में यदि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और अन्वेषण नहीं किया गया तो भविष्य में क्रूज संचालन या नाव संचालित करने वाला व्यक्ति कोई अनहोनी होने पर अन्य व्यक्तियों को डूबता हुआ छोड़ेगा और इस कार्य की पुनरावृत्ति होगी। उपरोक्त प्रकार की घटनाओं को रोकने हेतु न्यायालय घटना के समय क्रूज पर मौजूद चालक तथा अन्य सदस्यों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किये जाने का आदेश स्वतः संज्ञान लेकर देता है। यह न्यायालय कूज में डूब रहे व्यक्तियों को बचाने वालों की सराहना करता है। आपको निर्देशित किया जाता है कि उक्त संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर इस न्यायालय को 02 दिवस में सूचित करें और अन्वेषण करें।

निष्कर्ष: न्यायालय बयान और भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि अनुभव और प्रमाण के आधार पर आगे बढ़ता है। इस मामले में पायलट की आवाज बड़ी मार्मिक है। सुनने वाली की भावनाओं को जागृत कर देती है और कोई भी व्यक्ति माफ कर सकता है लेकिन जब आवाज को सुनने के स्थान पर कह गए शब्दों को पढ़ते हैं, और परिस्थिति को देखते हैं तब ध्यान में आता है कि पायलट और स्टाफ ने किसी भी यात्री को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। वह अपनी जान बचाकर सुरक्षित निकल आए। यही अपराध है।
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