जबलपुर, 02 मई 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी सिस्टम में लोगों को तंग करने की परंपरा बेरोकटोक जारी है। एक व्याख्याता ने अपना सारा लेनदेन सेवा में रहते ही पूरा कर दिया था। वेतन गणना में गलती पर रिकवरी भी करवा दी थी, फिर भी उसके रिटायर होने के बाद रिकवरी आर्डर जारी कर दिया। अब मामला हाई कोर्ट में है और उच्च न्यायालय ने रिकवरी ऑर्डर के पालन पर रोक लगा दी है।
The High Court stayed the order for recovery after retirement in a case where the employee had already made the payment during their period of service
अरविंद कुमार कुररिया सेवा निवृत लेक्चरर विरुद्ध मप्र शासन मामले में माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश पारित किया है। न्यायालय के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी ने बताया कि याचिकाकर्ता 30/10/2025 को व्याख्याता के पद से शास उ मा शाला दमोह सें सेवानिवृत्त हो गया है। दिनांक 23/2/2026 को शासन के द्वारा 2400000/ 24 लाख रुपए का रिकवरी नोटिस जारी कर दिया गया। तत्पश्चात याचिकाकर्ता ने शासन को अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हुए बताया की प्रार्थी के द्वारा रिकवरी पूर्व मैं करा दी है, याचिकाकर्ता के द्वारा शासन से कोई भी राशि नहीं ली गई। 24 लाख का रिकवरी आदेश विधि विरुद्ध है।
Arvind Kumar Kurariya, Retired Lecturer vs. Government of Madhya Pradesh
सेवा निवृत के पश्चात किसी भी प्रकार की कटौती कर्मचारी से नहीं की जा सकती। प्रार्थी ने माननीय हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने रिकवरी नोटिस दिनांक 30/5/2026 पर रोक लगा दी है एव अनावेदक गणों को नोटिस जारी करते हुए 4 सप्ताह के अंदर जवाब प्रस्तुत करने का समय दिया गया है।

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