नई दिल्ली, 25 मई 2026: मध्य प्रदेश के गुण पुलिस थाने में राजस्व निरीक्षक दिव्यराज धाकड़ एवं उनके परिवार जनों के खिलाफ दर्ज किए गए दहेज एक्ट के मामले में उनकी माताजी, दोनों बहन और बहनोई को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया जाएगा लेकिन कोर्ट में केस चलेगा और यदि सपना धाकड़ ने परिवार वालों के खिलाफ कोई सबूत पेश कर दिया तो फिर उनके खिलाफ भी मुकदमा शुरू हो जाएगा। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने 'आरती मेहता और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य' मामले में ससुराल पक्ष के चार सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और घरेलू हिंसा के मामले को, उनके खिलाफ सबूत मिलने तक रद्द कर दिया है।
Revenue Inspector Divyaraj Dhakad Case Reaches Supreme Court, Family Gets Temporary Relief
यह मामला सपना धाकड़ (शिकायतकर्ता) और उसके पति दिव्यराज धाकड़ के बीच वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। दिव्यराज धाकड़ श्योपुर, मध्य प्रदेश में राजस्व निरीक्षक (Revenue Inspector) के पद पर तैनात हैं। उनकी शादी 19 नवंबर, 2019 को हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि शादी के समय उसके पिता ने 31 लाख रुपये नकद और 10 लाख रुपये के सोने के जेवर दहेज में दिए थे।
शादी के कुछ समय बाद, पति ने पिता के कैंसर के इलाज का हवाला देकर और पैसे की मांग शुरू कर दी। सपना धाकड़ ने आरोप लगाया कि जब उसने और पैसे लाने से मना किया, तो उसके पति और रिश्तेदारों (आरती मेहता (ननद), श्रीवती बाई धाकड़ (सास), मनीषा धाकड़ (जेठानी) और विक्रम धाकड़ (जेठ)) ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
अपीलकर्ताओं (रिश्तेदारों) का पक्ष:
वकील ने तर्क दिया कि रिश्तेदारों को केवल पति का संबंधी होने के कारण झूठा फंसाया गया है। आरोप 'अस्पष्ट और सामान्य' (Omnibus) प्रकृति के हैं, जिनमें किसी विशिष्ट घटना या तारीख का जिक्र नहीं है। सपना अपने पति के साथ श्योपुर में सरकारी आवास में रहती थी, जबकि रिश्तेदार शिवपुरी में अलग रहते थे, इसलिए उनके साथ कोई 'साझा गृहस्थी' (Shared Household) नहीं थी। यह एफआईआर पति द्वारा तलाक की याचिका दायर करने के बाद 'प्रतिशोध' की भावना से की गई थी।
शिकायतकर्ता (पत्नी) का पक्ष:
तर्क दिया गया कि एफआईआर में हर छोटी घटना का विस्तृत विवरण (Encyclopaedic narration) देना आवश्यक नहीं है। दहेज की मांग और प्रताड़ना के गंभीर आरोप हैं, जिनकी सच्चाई का फैसला ट्रायल के दौरान होना चाहिए। ससुराल पक्ष के सदस्यों ने पति का साथ दिया और उसे घर से निकालने में भूमिका निभाई।
न्यायालय का विश्लेषण और विशेष टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता द्वारा दायर तलाक की याचिका और एफआईआर का सूक्ष्मता से मिलान किया। न्यायालय ने पाया कि गंभीर आरोप जैसे, कमरे में छिपे हुए कैमरे और रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाना, पिस्तौल से धमकाना, और मारपीट करना, केवल पति दिव्यराज के खिलाफ थे।
न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:
कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक संबंधों में गिरावट आने पर गुस्से और हताशा में पूरे परिवार को आपराधिक मुकदमेबाजी में खींचने की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति देखी जा रही है। बिना किसी विशिष्ट भूमिका के रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कानून को सक्रिय करना व्यक्तिगत स्कोर सेट करने का हथियार नहीं बनाया जा सकता।
केवल पति का समर्थन करना या वैवाहिक विवाद में हस्तक्षेप न करना 'आपराधिक क्रूरता' या 'घरेलू हिंसा' की श्रेणी में नहीं आता।
न्यायालय का निर्णय और कानूनी पहलू
न्यायमूर्ति कोटिश्वर सिंह द्वारा लिखे गए निर्णय में निम्नलिखित आदेश दिए गए:
आरती मेहता, श्रीवती बाई, मनीषा और विक्रम धाकड़ के खिलाफ धारा 498A, 34 IPC, दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4, तथा घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) की धारा 12 के तहत लंबित सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया गया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पति दिव्यराज धाकड़ के खिलाफ ट्रायल बिना किसी बाधा के जारी रहेगा।
धारा 319 CrPC का विकल्प:
कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच रखा कि यदि ट्रायल के दौरान पति के खिलाफ सबूतों से इन रिश्तेदारों की कोई विशिष्ट भूमिका सामने आती है, तो ट्रायल कोर्ट उन्हें धारा 319 CrPC (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 358) के तहत फिर से समन कर सकता है।
Double Jeopardy: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि इन रिश्तेदारों का पूरा ट्रायल नहीं हुआ है, इसलिए धारा 482 के तहत कार्यवाही रद्द होना उन्हें भविष्य में (साक्ष्य मिलने पर) आरोपित किए जाने से नहीं रोकता और यह संविधान के अनुच्छेद 20(2) का उल्लंघन नहीं होगा।
इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट ने संदेश दिया है कि जहां महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाना अनिवार्य है, वहीं निर्दोष रिश्तेदारों को अदालती कार्यवाही की कठोरता से बचाना भी न्याय के हित में आवश्यक है।

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