भोपाल, 06 MAY 2026: पॉश इलाके व्यापम चौराहे पर हुई एक सनसनीखेज लूट की वारदात ने Bhopal Police की कार्यप्रणाली और मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जब रक्षक ही सुस्त पड़ गए, तो एक आम नागरिक को खुद ही 'जासूस' और 'सिपाही' बनना पड़ा। यह कहानी है एक जांबाज कैंटीन संचालक की, जिसने पुलिस की negligence को एक्सपोज करते हुए खुद लुटेरे को दबोच लिया।
Bhopal Loot Case: Victim Traces and Catches Accused on His Own
चाकू की नोंक पर 'Mobile' लूट घटना रविवार रात करीब आठ बजे की है। कामधेनु कॉम्प्लेक्स निवासी 38 वर्षीय वीर सिंह पवार, जो एक कैंटीन चलाते हैं, एमपी नगर से न्यू मार्केट की ओर जा रहे थे। व्यापम चौराहे के पास जैसे ही उनका फोन बजा, वे बात करने के लिए रुके। इसी बीच एक बदमाश ने उन्हें घेर लिया और चाकू अड़ाकर (at knife-point) उनका सोने का ब्रेसलेट, पर्स और नकदी लूट ली। जब वीर सिंह ने विरोध किया, तो आरोपित ने उनके साथ मारपीट की और वहां से भाग निकला।
पुलिस का रवैया: फरियादी पर ही डाउट करने लगी
वारदात के तुरंत बाद पीड़ित हबीबगंज थाने पहुंचे। लेकिन पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। तत्काल एक्शन लेने के बजाय, पुलिस ने फरियादी को ही संदिग्ध (suspicious) मानते हुए मामले को 'जांच' में डाल दिया। FIR दर्ज करने में भी घंटों की देरी की गई। पुलिस की इस lethargic approach ने पीड़ित को खुद मैदान में उतरने पर मजबूर कर दिया।
पीड़ित की 'Filmy' बहादुरी: खुद किया पीछा और दबोचा
पुलिस की बेपरवाही देख वीर सिंह पवार अगले दिन खुद ही लुटेरे की तलाश में निकल पड़े। हैरानी की बात यह है कि जिस चौराहे पर वारदात हुई थी, आरोपित वहां बेखौफ घूमता मिला। शायद उसे पता था कि पुलिस उसे पकड़ने के लिए नहीं आएगी लेकिन शायद उसको यह नहीं पता था कि, जिस आदमी को लूट लिया है, वह तो आ सकता है। वीर सिंह ने साहस दिखाते हुए उसका पीछा किया और उसे व्यापम चौराहे से छह नंबर तक खदेड़ा। जब उन्होंने आरोपित को घेराबंदी में लिया, तब जाकर पुलिस को सूचना दी और पुलिस को मौके पर पहुंचकर उसे हिरासत में लेना पड़ा।
शातिर लुटेरा, पुलिस का वांटेड भी है
पकड़ा गया आरोपित जितेंद्र अहिरवार (34), प्रेमपुरा का रहने वाला है। वह कोई साधारण चोर नहीं बल्कि एक hardened criminal है। उसके खिलाफ कोलार सहित कई थानों में Arms Act जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं और कई अदालती वारंट पेंडिंग हैं। ऐसे अपराधी का खुलेआम घूमना और पुलिस का हाथ पर हाथ धरे बैठना कानून व्यवस्था पर तमाचा है।
पुलिस का कमजोर बचाव
मामले में किरकिरी होने के बाद पुलिस बचाव की मुद्रा में है। हबीबगंज थाना प्रभारी नीतू कुंसारिया का कहना है कि उन्होंने शुरुआती जांच के बाद ही FIR दर्ज की थी और आरोपित की शिकायत के कुछ ही देर बाद कार्रवाई की गई। हालांकि, हकीकत यह है कि यदि वीर सिंह खुद रिस्क लेकर लुटेरे का पीछा नहीं करते, तो शायद यह history-sheeter आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर होता।
पुलिस की ऐसी लापरवाही से पैदा होती है मोब लिंचिंग
यह घटना भोपाल पुलिस के लिए एक वेक-अप कॉल (Wake-up call) होनी चाहिए। अगर जनता का पुलिस से भरोसा उठ गया और लोग खुद ही न्याय करने या अपराधियों को पकड़ने के लिए मजबूर हुए, तो कानून व्यवस्था का क्या होगा? इतिहास गवाह है, पुलिस की इस प्रकार की लापरवाही के कारण ही जनता में मोब लिंचिंग की भावना पैदा होती है। खाकी को यह समझना होगा कि उनका काम केवल अपराध के बाद फाइलें भरना नहीं, बल्कि अपराध की सूचना मिलते ही तत्परता (Promptness) दिखाना भी है। वीर सिंह पवार की बहादुरी को सलाम है, लेकिन पुलिस की सुस्ती पर यह एक गहरा तमाचा है।

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