भोपाल, 04 मई 2026: मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंजूरी के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री प्रियंक मिश्रा को भोपाल का कलेक्टर बनाया है। वह सक्रिय भी है परंतु जनगणना के काम में काफी लापरवाह दिखाई दे रहे हैं। जबकि भोपाल में जनगणना के लिए वह नोडल अधिकारी हैं। हालत यह कि आज सोमवार तक जनगणना ड्यूटी में लगाए गए कर्मचारियों को ID तक नहीं दी गई है। कई इलाकों में मकान गणना का काम शुरू नहीं हो पाया है। सरल सवाल यह है कि भोपाल के कलेक्टर को जनगणना के कार्य में लापरवाही का नोटिस कौन देगा?
जनगणना अभियान नहीं अधिनियम के तहत कानूनी जिम्मेदारी
जनगणना कोई योजना, अभियान या मिशन नहीं है बल्कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत राष्ट्रीय महत्व की अनिवार्य जिम्मेदारी है। कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी, कोई भी कलेक्टर अथवा पटवारी, जनगणना के काम में लापरवाही नहीं कर सकता है। यदि वह ऐसा करता है तो, न केवल उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है बल्कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत मामला दर्ज हो सकता है। धारा 11 रहती है कि लोक सेवक जनगणना के काम में उचित तत्परता बरतनी होगी। लापरवाही करने पर मामला दर्ज किया जा सकता है जिसमें 3 साल जेल का प्रावधान है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टरों ने, जनगणना के काम में लगे हुए कर्मचारी की लापरवाही पर धारा 11 के तहत मामला दर्ज करने की आदेश भी दिए हैं।
Census Lapse in Bhopal: Notice Likely Over Delay in Staff IDs, Collector Under Lens
भोपाल में प्रख्यात पत्रकार श्री देव कुमार ने एक्सपोज किया है कि, भोपाल के कई क्षेत्रों में अब तक मकान गणना शुरू नहीं हो पाई है। कर्मचारियों को ID कार्ड तक नहीं मिले, मैपिंग अधूरी है और फील्ड वर्क की तैयारी 0 है। ये सरकार और सिस्टम की नाकामी है, जिसकी वजह से जनगणना जैसा काम भी समय पर शुरू नहीं हो पा रहा। अब जबकि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही सामने आ चुकी है तो फिर बिल्कुल वैसी ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जैसी फील्ड के कर्मचारियों के खिलाफ होती है।

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