भोपाल, 04 मई 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने भोपाल के तालाब के संरक्षण के लिए एक नया प्लान बनाया है। उन्होंने डिसाइड किया है कि, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फण्ड से भोपाल के तालाब का संरक्षण करवाएंगे। CSR फंड क्या होता है, नहीं जानते तो आगे बताऊंगा पहले समाचार पढ़ लीजिए:-
Bhopal Collector Plans Lake Conservation Through Big Corporates
तो खबर यह है कि भोपाल जिले में समग्र विकास को गति देने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फण्ड के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। इसी क्रम में उन्होंने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विकास कार्यों की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की। कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि सीएसआर फण्ड के माध्यम से भोपाल की झीलों, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि औद्योगिक इकाइयाँ अपने वार्षिक सीएसआर प्लान में झीलों के किनारों पर मियावाकी तकनीक से वृक्षारोपण, ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोद्धार, पार्कों का पुनर्विकास तथा प्राचीन बावड़ियों और कुओं के संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दें।
उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भी योगदान बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि वृद्धाश्रम, दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष स्कूल, ग्रामीण क्षेत्रों में मॉडल स्कूल निर्माण तथा स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रोजेक्ट्स को भी सीएसआर के तहत शामिल किया जाए। साथ ही मेट्रो एवं फ्लाईओवर के नीचे स्पोर्ट्स टर्फ विकसित करने जैसे नवाचारों को भी प्रोत्साहित किया गया।
सीएसआर फंड से संचालित कार्यक्रमों की प्रशासनिक मॉनिटरिंग की जाएगी
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सीएसआर से किए जाने वाले सभी कार्यों की प्रशासनिक स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। बैठक में एमपीआईडीसी के अधिकारियों के साथ समन्वय कर इंडस्ट्रियल हाउसिंग प्रोजेक्ट, स्लम पुनर्वास, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और भविष्य की शहरी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि इन पहलों से न केवल आधारभूत सुविधाओं का विकास होगा, बल्कि औद्योगिक इकाइयों को कुशल मानव संसाधन भी उपलब्ध हो सकेगा।
सीएसआर फंड क्या होता है
सीएसआर का फुल फॉर्म है कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) या निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व। यह एक ऐसी अवधारणा है जिसके तहत कंपनियां समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं। भारत में यह केवल एक नैतिक कर्तव्य नहीं बल्कि एक कानूनी अनिवार्यता भी है। सरल शब्दों में, यह कंपनियों द्वारा समाज के कल्याण के लिए दान किया जाने वाला पैसा है। भारत दुनिया का पहला देश है जिसने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत सीएसआर को अनिवार्य बनाया है।
अब इसको बहुत सरल शब्दों में समझ लीजिए। रिलायंस कंपनी और उसके मालिक मुकेश अंबानी को तो आप जानते ही हैं। नीता अंबानी को भी आप जानते हैं। कई बार आपने देखा होगा नीता अंबानी, समाज सेवा के काम करती है। श्री मुकेश अंबानी के सुपुत्र भी समाज सेवा का बड़ा काम करते हैं। यह सब कुछ कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड से किया जाता है। कहने का मतलब यह है कि, CSR को कानून बनाकर करोड़पति कारोबारी को दान के लिए बाध्य तो कर दिया गया है परंतु कॉरपोरेट कंपनी वाले भी बड़े चतुर हैं। इसके माध्यम से अपनी ब्रांडिंग करते हैं। तो थोड़ा सा सवाल यह है कि क्या भोपाल के तालाब में, भोपाल के करोड़पति कारोबारी की कंपनियों के विज्ञापन चलेंगे?
मियावाकी तकनीक (Miyawaki Technique) क्या है?
कलेक्टर कार्यालय द्वारा भेजी गई जानकारी में मियावाकी तकनीक का भी जिक्र किया गया है। यह जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक तकनीक है। इसमें छोटे स्थानों पर बहुत घने जंगल उगाए जाते हैं। ये जंगल साधारण जंगलों की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना अधिक घने होते हैं।

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