भोपाल समाचार, 17 अप्रैल 2026: के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा भोपाल एवं इंदौर के पुलिस आयुक्तों, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों एवं संबंधित इकाइयों को एक महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया गया है। सामान्य शब्दों में समझने के लिए इस सर्कुलर को गिरफ्तारी की नई गाइडलाइन कहा जाना चाहिए।
MP Police Issues New Arrest Guidelines After Supreme Court Order, PHQ Releases Circular
यह परिपत्र आपराधिक अपील के विरुद्ध महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य में दिनांक 06 नवंबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में जारी किया गया है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारणों को जानने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। इस अधिकार के संरक्षण के लिए न्यायालय ने पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इसी तारतम्य में पुलिस मुख्यालय ने परिपत्र जारी किया है।
गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताना होगा
जारी परिपत्र के अनुसार, पुलिस द्वारा किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय गिरफ्तारी के ठोस कारणों को लिखित रूप में गिरफ्तार व्यक्ति को देना अनिवार्य किया गया है, केवल मौखिक जानकारी को पर्याप्त नहीं माना जाएगा। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गिरफ्तारी के आधार स्थानीय भाषा अथवा ऐसी भाषा में लिखे जाएं, जिसे गिरफ्तार व्यक्ति भली-भांति समझ सके।
लिखित जानकारी गिरफ्तारी के बाद भी दी जा सकती है
निर्देशों में यह भी उल्लेखित है कि यह लिखित जानकारी गिरफ्तारी के समय अथवा अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने से कम से कम दो घंटे पूर्व उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, अभियुक्त को लिखित आधार प्रदान किए जाने की जानकारी को गिरफ्तारी पंचनामा अथवा संबंधित अभिलेख में विधिवत दर्ज किया जाना भी अनिवार्य होगा। इस संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 47 के प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है।
गाइडलाइन का उल्लंघन तो गिरफ्तारी अवैध और अधिकारी के खिलाफ कंटेंप्ट आफ कोर्ट
परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि उक्त निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जा सकता है। साथ ही संबंधित अधिकारी के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना अथवा विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है और अभियुक्त को तत्काल रिहाई का अधिकार प्राप्त हो सकता है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों एवं संबंधित इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे इन दिशा-निर्देशों का पालन अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सख्ती से सुनिश्चित कराएं, ताकि विधिसम्मत कार्रवाई के साथ-साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों की भी पूर्ण रूप से रक्षा की जा सके।

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