भोपाल, 19 अप्रैल 2026: विधानसभा चुनाव 2029 की तैयारी में लगी हुई कांग्रेस पार्टी अब कोई भी गलती करने के मूड में नहीं है। एक बार जिला अध्यक्ष की नियुक्ति करने के बाद पूरे कार्यकाल तक उसका बोझ नहीं ढोया जाएगा। इंदौर, रतलाम, ग्वालियर, सतना सहित 12 जिला अध्यक्ष ऐसे हैं जो या तो पार्टी के लिए हानिकारक है या फिर काम ही नहीं कर रहे हैं। इन सभी को बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।
वामसी रेड्डी की रिव्यू रिपोर्ट में यह जिला अध्यक्ष फेल हो गए
वामसी रेड्डी को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से मध्य प्रदेश में पार्टी के जिला अध्यक्षों की समीक्षा करने के लिए भेजा गया था। उनकी रिव्यू रिपोर्ट में पुअर परफॉर्मेंस और पार्टी के लिए परेशान करने वाले नेताओं की लिस्ट तैयार हुई है। जो इस प्रकार है:-
डिंडोरी जिला अध्यक्ष ओंकार सिंह मरकाम बड़े नेता हैं। जिला अध्यक्ष के पद पर काम नहीं कर रहे।
आलीराजपुर के जिला अध्यक्ष मुकेश पटेल पहले इस्तीफा दे चुके हैं।
इंदौर शहर के जिलाध्यक्ष चिंटू चौकसे एक्टिव तो है लेकिन लड़ाई झगड़ा बहुत करते हैं। दिग्विजय सिंह से पंगा हो गया है इसलिए जीतू पटवारी भी इनको बचा नहीं पा रहे हैं।
सतना ग्रामीण जिला अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा विधायक हैं और कांग्रेस में पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। इसलिए जिला अध्यक्ष के पद पर समय नहीं दे पा रहे हैं।
मंडला के जिला अध्यक्ष डॉक्टर अशोक मर्सकोले पूर्व विधायक हैं और क्षेत्र के बड़े नेता हैं। वह जिला अध्यक्ष बनना ही नहीं चाहते थे। जबरदस्ती बना दिया इसलिए काम नहीं कर रहे।
- रतलाम शहर के शांतिलाल वर्मा,
- हरदा के मोहन साईं,
- मऊगंज के हरिलाल कोल,
- सिंगरौली की सरस्वती सिंह,
- ग्वालियर ग्रामीण के प्रभु दयाल जोहारे,
- अशोकनगर के राजेंद्र कुशवाहा,
- सतना शहर के आतिफ इकबाल सिद्दीकी,
- उमरिया के विजय कोल,
- नर्मदा पुरम के गुड्डन पांडे
इत्यादि ऐसे जिला अध्यक्ष हैं जो पार्टी के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
बड़ी रिसर्च और सर्वे के बाद जिला अध्यक्ष बनाए थे
कांग्रेस पार्टी ने इस बार मध्य प्रदेश में बड़ी रिसर्च और सर्वे के बाद जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। इसके लिए संगठन सृजन अभियान चलाया गया था। कहा गया था कि इसमें किसी भी प्रकार की गुटबाजी नहीं है। योग्यता के आधार पर जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसके बाद भी 12 जिला अध्यक्ष फेल हो गए।

.webp)