हाई कोर्ट में भूमि अधिग्रहण मुआवजे का केस जीतने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

Updesh Awasthee
जबलपुर, 20 अप्रैल 2026
: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में भूमि अधिग्रहण से जुड़े दो मामले खारिज कर दिए गए। ऐसा नहीं था कि उनकी मांग गलत थी, लेकिन याचिका में गलती के कारण दोनों मामले खारिज हो गए। किसी और के साथ ऐसा ना हो इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हम न्यायालय के दोनों ताजा निर्णय के आधार पर कुछ खास बातें बता रहे हैं ताकि लोगों को भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा मिल सके और न्यायालय का समय भी बर्बाद ना हो। 

Land Acquisition Compensation Cases: Key Points to Win Your High Court Battle

इन मामलों में याचिकाकर्ताओं की भूमि शहडोल टाउनशिप (Shahdol Township) के विकास के लिए अधिग्रहित की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी भूमि आवासीय (Residential) थी और उसका बाजार मूल्य बहुत अधिक था, लेकिन कलेक्टर द्वारा दिया गया मुआवजा कम था। उन्होंने धारा 18 के तहत मामले को सक्षम न्यायालय (Reference to Court) में भेजने की मांग की थी।

न्यायालय ने याचिका क्यों खारिज की?

न्यायमूर्ति दीपक खोत की पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने दो बड़ी कानूनी गलतियाँ की थीं:
बिना विरोध के भुगतान स्वीकार करना (Acceptance without Protest): याचिकाकर्ताओं ने मुआवजे की राशि प्राप्त करते समय कोई आधिकारिक विरोध दर्ज नहीं कराया था।
समय सीमा का उल्लंघन (Delay/Limitation): मुआवजे के नोटिस 2002 में जारी किए गए थे, जबकि संदर्भ (Reference) के लिए आवेदन 2011 में दिए गए, जो कि कानूनन निर्धारित 6 सप्ताह की अवधि से बहुत अधिक था।

कानूनी गाइड: कोर्ट में याचिका खारिज न हो, इसके लिए क्या करें?

न्यायालय के इस निर्णय के आधार पर, मुआवजे की वृद्धि चाहने वाले भू-स्वामियों के लिए निम्नलिखित कदम उठाना अनिवार्य है:
1. 'विरोध के साथ स्वीकार' करें: अदालत ने 'अश्वनी कुमार ढींगरा बनाम पंजाब राज्य' मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि आप मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं, तो राशि प्राप्त करते समय लिखित में यह दर्ज करें कि आप इसे "विरोध के अधीन" (Under Protest) स्वीकार कर रहे हैं।

Acceptance Under Protest: Always state in writing that you are accepting the compensation "without prejudice to your right to seek enhancement."

2. धारा 18 के तहत तत्काल आवेदन: अधिनियम की धारा 18 के तहत मुआवजे को चुनौती देने के लिए आवेदन समय पर दिया जाना चाहिए। यदि आप अवार्ड पारित होने के समय उपस्थित थे या आपको नोटिस मिल चुका है, तो नोटिस प्राप्ति के 6 सप्ताह (6 Weeks) के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है।

Prompt Application under Section 18: Ensure the application for reference is filed within the statutory period of six weeks from the date of receipt of the notice.

3. बिना विरोध स्वीकार करने के परिणाम 

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि एक बार आपने बिना किसी विरोध के मुआवजा स्वीकार कर लिया, तो आप भविष्य में मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग करने का अपना कानूनी अधिकार खो सकते हैं।

Consequences of Unconditional Acceptance: Once compensation is accepted without protest, the person may lose the right to a reference under Section 18. 

हाई कोर्ट ने 'मोहम्मद हसनुद्दीन बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले का संदर्भ देते हुए कहा कि कलेक्टर के पास निर्धारित समय के बाद प्राप्त आवेदन पर विचार करने की शक्ति नहीं है। अतः, भू-स्वामियों को जागरूक रहना चाहिए कि मुआवजा लेते समय लिखित विरोध (Written Protest) और समय सीमा (Limitation Period) का पालन ही उनके अधिकारों की रक्षा कर सकता है।
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