कर्मचारी को कारण बताए बिना सस्पेंड करने वाले अधिकारी को हाईकोर्ट ने लूप लाइन में भेजा

Updesh Awasthee
लीगल न्यूज डेस्क, 2 अप्रैल 2026
: पूरे भारत में हर रोज ऐसा होता है जब कोई ना कोई अधिकारी, किसी कर्मचारी को कारण बताए बिना ही सस्पेंड कर देता है। यानी कारण बताओं नोटिस दिए बिना ही सस्पेंड कर देता है। ऐसे मामलों में कर्मचारियों को हाई कोर्ट से राहत तो मिल जाती है लेकिन अधिकारी को सबक नहीं मिलता। इस बार ऐसा नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने मनमानी करने वाले अधिकारी को लूप लाइन में भेज दिया है। 

HC Acts Against Officer Over Unjust Suspension

यह मामला राजस्थान का है। जयपुर स्थित हाई कोर्ट आफ राजस्थान में सरकारी कर्मचारी प्रदीप गुप्ता द्वारा याचिका दाखिल की गई। श्री प्रदीप गुप्ता ने बताया कि वह धौलपुर डिपो में कंडक्टर के पद पर कार्यरत थे और 28 अक्टूबर 2025 को राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी ज्योति चौहान ने उनको सस्पेंड कर दिया। उनके नीलांबर आदेश में भी कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। मामले की प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने 27 नवंबर 2025 को निर्देश दिए थे कि कार्यकारी निदेशक यातायात (EDT) के समक्ष याचिकाकर्ता अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करे, और कार्यकारी निदेशक यातायात को 30 दिनों के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा।

इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया। कर्मचारी श्री प्रदीप गुप्ता ने बताया कि कार्यकारी निदेशक यातायात के पद पर पदस्थ ज्योति चौहान ने 16 जनवरी 2026 को, उनके निलंबन आदेश को सही ठहराते हुए अभ्यावेदन को खारिज कर दिया और इसके पीछे कोई कारण दर्ज नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए कहा कि बिना कारण बताए लिया गया निर्णय न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में तीखी टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि इस प्रकार के निर्णय रोडवेज जैसे सरकारी संस्थानों में प्रतिभा के पलायन को बढ़ावा देते हैं। हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपने आदेशों में विधिक प्रक्रिया और तर्कसंगतता का पालन करना अनिवार्य है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने राजस्थान यातायात की कार्यकारी निदेशक ज्योति चौहान द्वारा जारी किए गए आदेश दिनांक 16 जनवरी 2026 को निरस्त कर दिया और रोडवेज के प्रबंध निदेशक को कर्मचारी के अभ्यावेदन पर विधिसम्मत तरीके से निर्णय लेने का निर्देश दिया। 

High Court Sends Officer to Loop Line for Suspending Employee Without Reason

इसी के साथ हाई कोर्ट ने राजस्थान कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव को निर्देश दिया कि वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी ज्योति चौहान को प्रशासनिक प्रक्रिया और कानूनी सिद्धांतों का प्रशिक्षण दिलवाएं। जब तक यह प्रशिक्षण नहीं हो जाता है, तब तक ज्योति चौहान को मानव संसाधन से जुड़े किसी भी कम से दूर रखा जाए। इसका मतलब हुआ की ज्योति चौहान को ऐसा काम दिया जाए जिसमें उन्हें कर्मचारियों को नियंत्रित करने अथवा उनके खिलाफ कार्रवाई करने का कोई अधिकार न हो। सामान्य प्रशासनिक बातचीत में इस प्रकार की पदस्थापना को लूप लाइन कहते हैं।
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