भोपाल समाचार, 23 अप्रैल 2026: हर्षा रिछारिया और कंट्रोवर्सी, जैसे एक सिक्के के दो पहलू हो गए हैं। दोनों एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ते। महाकुंभ के दौरान नकली बाल लगाकर रिकॉर्ड की गई REELs वायरल हो जाने के बाद हर्षा रिछारिया अपनी प्रोफेशनल लाइफ में वापस जाने को तैयार नहीं है और संत समाज उसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने उसके संन्यास पर सवाल उठाते हुए कहा कि, 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती।
Harsha Richhariya Faces Online Debate Over Diksha and Sanyas, Questions Raised
हर्षा रिछारिया ने पिछले दिनों ऐलान किया था कि वह अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। वे आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने कहा- यह पूरा घटनाक्रम गलत और सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती। प्रयागराज कुंभ के दौरान हर्षा ने संन्यास लेने का दावा किया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हर्षा को दीक्षा दिलाने वाले सुमनानंदजी महाराज की जांच हो। कहा कि संन्यास एक गहन और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसे बचपन से साधना और अनुशासन के साथ अपनाया जाता है। संन्यास लेने वाले को वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है।
अब हर्षा का क्या होगा
अनिलानंद जी की बात तो सही है। सन्यास कोई शॉर्ट टर्म कोर्स नहीं होता, कि कोई भी पर्यटन पर आए और संन्यास लेकर चला जाए। संन्यास की दीक्षा से पहले, कई कठिन परीक्षाओं से गुजरना होता है। सन्यास धारण करने से पहले सन्यासी जीवन के प्रयोग करने पड़ते हैं। सन्यास को ऑनलाइन ऑर्डर नहीं किया जा सकता। अब सवाल यह उठता है कि यदि संत समाज ने हर्षा रिछारिया को स्वीकार नहीं किया तो हर्षा रिछारिया का क्या होगा। एक तरफ वह पिंडदान कर चुकी है। सन्यास धारण कर लिया यानी विवाह नहीं कर सकती और दूसरी तरफ संत समाज ठुकरा देगा, तो हर्षा रिछारिया का क्या होगा।

.webp)