जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए 1 करोड़ बीमा की मांग

Updesh Awasthee
भोपाल/मध्य प्रदेश, 22 अप्रैल 2026
: राष्ट्र के निर्माण और उसकी रूपरेखा तैयार करने में जनगणना (Census) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत स्तंभ है। लेकिन, इस विशाल कार्य को धरातल पर उतारने वाले लाखों कर्मचारी आज अपनी सुरक्षा और सम्मान को लेकर चिंतित हैं। प्राथमिक माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ (PMUMS), मध्य प्रदेश के प्रदेश महामंत्री विनोद राठौर ने जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों की दयनीय स्थिति और जोखिम को देखते हुए सरकार से ठोस सुरक्षा उपायों की मांग की है।

Census Duty Staff Seek ₹1 Crore Insurance Cover, Demand Gains Attention

श्री राठौर के अनुसार, जनगणना ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी तपती गर्मी में दिन-रात फील्ड में काम करते हैं। वे अक्सर विषम भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का सामना करते हैं। संघ का तर्क है कि जब चुनाव ड्यूटी जैसे कार्यों में शहीद होने वाले कर्मचारी के लिए 20 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान है, तो जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के लिए केवल औपचारिकताएं क्यों निभाई जा रही हैं?

मुख्य मांग: ₹1 करोड़ का सुरक्षा कवच

कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए, विनोद राठौर ने जनगणना विभाग से स्पष्ट मांग की है कि:
ड्यूटी पर तैनात प्रत्येक कर्मचारी का कम से कम ₹1 करोड़ का बीमा अनिवार्य किया जाए। ड्यूटी के दौरान किसी अनहोनी या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारी के परिवार को असहाय न छोड़ा जाए।

"सम्मान और सुरक्षा का अधिकार"

यह मांग केवल वित्तीय सहायता के बारे में नहीं है, बल्कि यह उन 'नेशन बिल्डर्स' के सम्मान और गरिमा (Dignity) से जुड़ी है जो धूप और धूल की परवाह किए बिना घर-घर जाकर आंकड़े जुटाते हैं। समाचार का केंद्र बिंदु यह है कि यदि एक कर्मचारी राष्ट्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित करता है, तो उसके परिवार के भविष्य को अंधकारमय होने से बचाना राज्य का नैतिक कर्तव्य है।

विनोद राठौर (PMUMS MP) ने जोर देते हुए कहा है, "हमारा उद्देश्य राष्ट्र सेवा करने वालों को उचित संरक्षण देना है। जो देश की गणना करता है, उसके परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी देश की होनी चाहिए"।

जनगणना जैसे 'रिस्पांसिबिलिटी' वाले काम में लगे कर्मचारियों को अब उम्मीद है कि सरकार उनकी इस जायज मांग पर संवेदनशीलता से विचार करेगी। यह न केवल उनके मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि राष्ट्र सेवा के प्रति उनके समर्पण को एक नई सुरक्षा और पहचान भी देगा।
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