आलीराजपुर स्टेट की विवादित पैतृक संपत्तियों पर जिला न्यायालय का स्थगन

Updesh Awasthee
आलीराजपुर, 10 अप्रैल 2026:
आलीराजपुर से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला न्यायिक आदेश सामने आया है। जिला न्यायाधीश (द्वितीय) माननीय श्री आर.पी. सेवेतिया की अदालत ने 7 अप्रैल 2026 को पारित अपने आदेश में आलीराजपुर स्टेट की विवादित पैतृक संपत्तियों के विक्रय, हस्तांतरण या किसी भी प्रकार के अंतरण पर 6 माह का सख्त स्टे लगा दिया है। यह आदेश आदेश 39 नियम 1 एवं 2 सहपठित धारा 151 सीपीसी के तहत जारी किया गया है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संरक्षण आवश्यक माना।

क्या है मामला, राजसी विरासत पर उत्तराधिकार का संघर्ष

यह पूरा विवाद आलीराजपुर स्टेट की ऐतिहासिक और जन उपयोगी संपत्तियों को लेकर है, जिनमें राजवाड़ा पैलेस परिसर और फतेह क्लब ग्राउंड जैसी धरोहर शामिल हैं। आवेदकों का आरोप है कि एक संदिग्ध वसीयत (Will) के आधार पर राजस्व विभाग ने नामांतरण कर दिया, जिससे इन संपत्तियों को बेचने का रास्ता खुल गया। इससे आम जनता में भारी आक्रोश और चिंता थी कि शहर की ऐतिहासिक धरोहर निजी हाथों में चली जाएगी।

आवेदकों का पक्ष, HUF संपत्ति का दावा

आवेदक उदयभान सिंह (33) एवं चंद्रभान सिंह (29), जो स्व. महेंद्र प्रताप सिंह राठौर के पुत्र हैं, ने दावा किया कि:
यह सम्पूर्ण संपत्ति संयुक्त हिंदू परिवार (HUF) की अविभाजित पैतृक संपत्ति है।
पूर्व महाराजा प्रतापसिंह जी के चार पुत्रों में समान हिस्सेदारी थी।
उनके अनुसार, माधवसिंह की शाखा को भी वैधानिक हिस्सा मिलना चाहिए।
वर्ष 2025 में उन्हें जानकारी मिली कि तुषार सिंह ने कथित रूप से राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर 2022 की वसीयत के आधार पर संपत्ति पर कब्जा कर लिया।

अनावेदक तुषार सिंह का पक्ष

अनावेदक तुषार सिंह (53, देवगढ़, दाहोद) ने अपने पक्ष में कहा:
यह संपत्ति महाराजा सुरेन्द्रसिंह की व्यक्तिगत संपत्ति थी।
भारत सरकार के साथ हुए विलय अनुबंध के तहत यह उन्हें प्राप्त हुई।
उन्होंने यह संपत्ति कमलेन्द्रसिंह से वैध वसीयत के आधार पर प्राप्त की।
अतः वे इसके एकमात्र वैध स्वामी हैं। 

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि संपत्ति का हस्तांतरण हुआ तो:

नए पक्षकार जुड़ेंगे।
मुकदमा जटिल होगा।
न्याय प्रक्रिया प्रभावित होगी।
इसलिए यथास्थिति बनाए रखना अनिवार्य है।

आदेश की प्रमुख विशेषताएं

केवल अनावेदक क्रमांक 1 (तुषार सिंह) पर लागू।
अवधि: 6 माह (स्वतः समाप्ति के साथ)।
आवश्यकता पड़ने पर आवेदक पुनः आवेदन कर सकते हैं।
अन्य पक्षकारों के विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही जारी।
यह अंतरिम राहत है, अंतिम निर्णय अभी शेष।

जनता में खुशी की लहर :-

इस प्रारंभिक निर्णय के बाद शहर में राहत और खुशी का माहौल है। स्थानीय सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक प्रतिनिधियों एवं इतिहास प्रेमियों ने इसे सांस्कृतिक विरासत, जनहित और धरोहर संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम  बताया।

स्टे की ख़बर से जिला मुख्यालय आलीराजपुर 

के जागरूक नागरिक मंच अध्यक्ष विक्रम सेन, पूर्व भाजपा अध्यक्ष किशोर शाह, पार्षद संतोष थेपड़िया, समाजसेवी आशुतोष पंचोली, मुस्तफा बोहरा, पर्वत सिंह राठौर, एडवोकेट राजेश राठौर, गिरिराज मोदी, राजेंद्र टवली, निलेश जैन, गोविंदा गुप्ता, शहर काजी सैयद हनीफ मियां, संजय तोमर, राजेंद्र भाई पटेल, सादिक चंदेरी, दीपक दीक्षित, किशन राठौड़, ललित मोदी और सुरेश सारडा जैसे प्रतिनिधियों ने इसे धरोहर रक्षा की जीत बताया। अगले 6 महीनों में दोनों पक्षों को दावे सिद्ध करने होंगे, जो आलीराजपुर की राजसी विरासत का भविष्य तय करेगा।

कानूनी आधार और प्रभाव

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्टे स्वतः समाप्त होगा, लेकिन आवेदक पुनः आवेदन कर सकते हैं; अन्य पक्षकारों पर एकपक्षीय कार्यवाही जारी रहेगी। यह आदेश अंतिम निर्णय तक धरोहर को सुरक्षित रखेगा, जिसमें HUF बनाम व्यक्तिगत स्वामित्व का निर्धारण होगा। आलीराजपुर की 15वीं शताब्दी से चली आ रही रियासत की यह संपत्ति, जो आदिवासी बहुल क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है, अब दस्तावेजी साक्ष्यों पर तय होगी।

उपरोक्त जानकारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जागरूक नागरिक मंच के अध्यक्ष विक्रम सेन ने दी।
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