छतरपुर, 1 मार्च 2026: किसी भी सरकार, शासन व्यवस्था और इस मामले में कलेक्टर के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा कि, एक व्यक्ति की मौत इसलिए हो गई क्योंकि छतरपुर जैसे शहर में होने के बावजूद उसकी एंबुलेंस नहीं मिली। एसपी के लिए इससे ज्यादा शर्माना क्या होगा कि, ट्रैफिक व्यवस्था खराब होने के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। हेलमेट के लिए मोर्चा बांधने वाली पुलिस ने गंभीर स्थिति में जा रहे मरीज के वाहन को रास्ता नहीं दिलवाया।
बेटे ने चलती गाड़ी में सीपीआर देने की कोशिश की
जानकारी के अनुसार, राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम तालगांव निवासी जगदीश विश्वकर्मा अपने बेटे संतोष विश्वकर्मा के साथ शहर आए थे। रास्ते में ग्राम बरकोंहाँ के पास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजनों का कहना है कि मौके पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूरन उन्हें एक लोडिंग वाहन से जिला अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में हालत बिगड़ने पर उनके बेटे ने चलती गाड़ी में ही सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देने की कोशिश की।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शहर में ट्रैफिक जाम के कारण अस्पताल पहुंचने में भी देरी हुई। कुछ लोगों ने आगे बढ़कर रास्ता साफ कराया, तब वाहन अस्पताल तक पहुंच सका।
जिला अस्पताल की ड्यूटी डॉक्टर अदिति अग्रवाल ने बताया कि मरीज को सीने में दर्द और गंभीर स्थिति में लाया गया था। जांच के दौरान उन्हें मृत पाया गया।
सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने कहा कि मरीज को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि मरीज ‘ब्रॉट डेड’ अवस्था में आया था, यानी अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उसका निधन हो गया था।
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जिस मध्य प्रदेश में मरीज की जान बचाने के लिए कलेक्टर को एयर एम्बुलेंस कॉल करने के अधिकार दिए गए हैं। उस प्रदेश के छतरपुर में कलेक्टर, मरीज के लिए सामान्य एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवा पाए।
जिस प्रदेश में एक मरे हुए व्यक्ति के अंगों को किसी अमीर व्यक्ति की बॉडी में लगाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाता है। वहां छतरपुर में एक गरीब मरीज के वाहन को ट्रैफिक में रास्ता नहीं मिल पाता। क्योंकि ट्रैफिक को कंट्रोल करने वाली पुलिस, कुछ और कर रही थी।

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