बड़ी खबर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगी महाकाल की नगरी उज्जैन, मध्य प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मिलेगी नई रफ़्तार

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 10 मार्च 2026 :
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (NH-752D) के बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी खंड के 4-लेन निर्माण को मंजूरी दे दी है।

Big Update: Ujjain to Be Connected with the Delhi–Mumbai Expressway

परियोजना की मुख्य बातें और लागत इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लंबाई 80.45 किलोमीटर है, जिसे 3,839.42 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एनुइटी मोड पर विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर न केवल सड़क नेटवर्क को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य के आर्थिक परिदृश्य को भी बदलने की क्षमता रखता है।

समय की बचत और सुगम यातायात 

इस परियोजना का सबसे प्राथमिक उद्देश्य यात्रा दक्षता में सुधार करना है। वर्तमान में बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी खंड की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जहाँ वाहनों की गति मात्र 20-50 किमी प्रति घंटा ही रह पाती है। इस नए 4-लेन कॉरिडोर के बनने से वाहनों की गति 80-100 किमी प्रति घंटा हो जाएगी, जिससे यात्रा के समय में लगभग एक घंटे की कमी आएगी। यह उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) पर स्थित टिमरवानी इंटरचेंज तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। 

सिंहस्थ कुंभ और क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर 

सूत्रों के अनुसार, यह कॉरिडोर गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने वाले यातायात के लिए सबसे छोटा मार्ग होगा। यह विशेष रूप से अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
इसके अतिरिक्त, यह मार्ग मध्य प्रदेश के धार और झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरता है। धार जिले के कुछ हिस्से नीति आयोग के 'आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम' के अंतर्गत आते हैं, जिन्हें इस बेहतर कनेक्टिविटी से सीधा लाभ मिलेगा।

आर्थिक और औद्योगिक लाभ 

बेहतर सड़क संपर्क से रसद (logistics) लागत में कमी आएगी। इससे इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक पार्क्स (MMLP) तक कच्चे माल और तैयार माल की आवाजाही बहुत आसान और तेज हो जाएगी।

तकनीकी विवरण और समय सीमा 

परियोजना के तकनीकी ढांचे पर नजर डालें तो इसमें शामिल हैं:
  • 6 प्रमुख पुल और 34 छोटे पुल।
  • 1 रोड अंडर ब्रिज (RUB) और कुल 42 अंडरपास (VUP/LVUP/SVUP)।
  • निर्माण अवधि: इसे 24 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • रियायत अवधि: कुल 17 वर्ष (2 वर्ष निर्माण + 15 वर्ष रखरखाव)।
इस परियोजना के पूरा होने से न केवल यात्रा सुरक्षित और सुगम होगी, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी।
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