ब्रह्मांड के रहस्य - वहां दूर बिल्कुल हमारे जैसा सौरमंडल बन रहा है, सूर्य, बृहस्पति, पृथ्वी बन चुके, शनि के संकेत मिले

Updesh Awasthee
ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 26 मार्च 2026
: भारत की प्राचीन कथाओं में अक्सर कहा जाता है कि, कलयुग के अंत में यह सौरमंडल समाप्त हो जाएगा और एक नए सौरमंडल पर जीवन प्रारंभ होगा। हम इस लेखक की शानदार कल्पना मानते थे लेकिन यह तो सच होती नजर आ रही है। वहां 437 प्रकाश वर्ष (light-years) दूर, बिल्कुल हमारे जैसा सौरमंडल बन रहा है। सूर्य, बृहस्पति और पृथ्वी जैसे ग्रह तो दिखाई देने लगे हैं। शनि जैसे ग्रहों का भी संकेत मिल रहा है। 

Universe Mystery Deepens: Scientists Spot Solar System Like Ours Forming Light Years Away

खगोलविदों (Astronomers) को यह बिल्कुल टाइम कैप्सूल जैसा लग रहा है। जैसे चार अरब साल पहले हमारा सौरमंडल बना था, सब कुछ बिल्कुल वैसा ही होता हुआ दिखाई दे रहा है। अंतर केवल इतना है कि इस बार भारत के नहीं बल्कि यूरोप के वैज्ञानिकों को दिखाई दे रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ गैलवे की वैज्ञानिक Chloe Lawlor उस टीम की लीडर है जो इस अद्भुत और अद्वितीय घटना की प्रत्यक्षदर्शी है। वैज्ञानिकों को सबसे पहले सूर्य दिखाई दिया था। उन्होंने सूर्य का नाम अपनी फाइल पर WISPIT 2 लिखा है। यह पृथ्वी से लगभग 437 प्रकाश वर्ष (light-years) दूर स्थित है। 

वैज्ञानिक दृष्टि से इसे 'शिशु' तारा माना जा रहा है क्योंकि इसकी आयु मात्र 5.4 मिलियन वर्ष है। तुलना के लिए, हमारा सूर्य लगभग 4.6 बिलियन वर्ष पुराना है। इसका मतलब हुआ कि हमारी गणना के अनुसार जब तक कलयुग समाप्त होगा, तब तक यह सूर्य अपने उस जाकर तक पहुंच जाएगा। जितना चार अरब साल पहले हमारे सौरमंडल के सूर्य का था? 

वैज्ञानिकों ने बताया कि, WISPIT 2 के चारों ओर गैस और धूल का एक डोनट के आकार का बादल है, जिसे Protoplanetary Disk कहा जाता है। इसी डिस्क के भीतर वैज्ञानिकों को दो ग्रहों के दर्शन हुए हैं। वैज्ञानिकों ने इनके नाम WISPIT 2b और WISPIT 2c रख दिए हैं। इन दोनों ग्रहों की अपनी विशेषताएं भी हैं:- 
WISPIT 2b: यह इस सिस्टम में खोजा गया पहला ग्रह था, जिसका पता पिछले साल चला था। इसका द्रव्यमान (mass) हमारे बृहस्पति (Jupiter) से लगभग पांच गुना अधिक है। यह अपने सूर्य से काफी दूरी (पृथ्वी-सूर्य की दूरी का 60 गुना) पर परिक्रमा करता है।
WISPIT 2c: यह हाल ही में खोजा गया नया ग्रह है, जो WISPIT 2b की तुलना में अपने तारे के चार गुना अधिक करीब है। 

इसकी खोज के लिए Very Large Telescope (VLT) के GRAVITY+ इंस्ट्रूमेंट का उपयोग किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि GRAVITY+ के हालिया अपग्रेड के बिना तारे के इतने करीब स्थित ग्रह का पता लगाना असंभव होता।

यूनिवर्सिटी ऑफ गैलवे की वैज्ञानिक Chloe Lawlor का कहना है कि, इसके माध्यम से हम अपने अतीत को देख पा रहे हैं। सब कुछ वैसा ही हो रहा है। ये ग्रह डिस्क में "grooves" (नालियां) बना रहे हैं, क्योंकि वे परिक्रमा करते समय अपने गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से धूल और सामग्री को इकट्ठा कर रहे हैं, जिससे उनका आकार बढ़ रहा है। 

शनि जैसे ग्रहों के संकेत भी मिले 

वैज्ञानिकों ने देखा तो नहीं है, लेकिन इस सौरमंडल में तीसरे ग्रह के होने के संकेत भी मिले हैं। डिस्क में एक संकरी और उथली जगह (gap) को देखते हुए वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वहां शनि (Saturn) के द्रव्यमान वाला एक और ग्रह हो सकता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अटाकामा मरुस्थल में निर्माणाधीन Extremely Large Telescope (ELT) की मदद से भविष्य में इस पूरे सिस्टम की और भी स्पष्ट तस्वीरें मिल सकेंगी।

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