भोपाल, 21 मार्च 2026: मध्य प्रदेश में आज की तारीख में लगभग पांच विधायक ऐसे हैं, जो भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव नहीं जीते लेकिन जब मौका आता है तो भाजपा के साथ खड़े हो जाते हैं। इस लिस्ट में अब रीवा की सिमरिया विधानसभा से विधायक श्री अभय मिश्रा का नाम भी शामिल हो सकता है। यदि राज्यसभा चुनाव में श्री अभय मिश्रा ने भाजपा के इशारे पर मतदान नहीं किया तो उनकी विधायक की खतरे में पड़ सकती है। वैसे भी साडेसाती शनि शुरू हो चुका है। यह कर्मों का फल मिलने का समय है।
Rajya Sabha Polls: Will Congress MLA Abhay Mishra Vote for BJP Candidate?
बात ऐसी है कि श्री अभय मिश्रा के खिलाफ भाजपा के प्रत्याशी श्री कृष्णपति त्रिपाठी ने चुनाव याचिका दाखिल कर रखी है। मिश्रा जी केवल 637 वोटो से चुनाव जीते थे। अब तक मामला ठंडा पड़ा हुआ था लेकिन राज्यसभा चुनाव आने से पहले त्रिपाठी जी एक्टिव हो गए। जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने माना कि याचिका में उठाए गए आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और इनकी सुनवाई जरूरी है। इसके साथ ही मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। यानी तलवार लटक गई है। हाईकोर्ट ने मिश्रा जी को 4 सप्ताह के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ किया कि याचिका को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
यह मध्य प्रदेश की पॉलिटिकल स्टाइल है। यदि मिश्रा जी ने भाजपा कार्यालय के सामने सरेंडर नहीं किया तो हाई कोर्ट की चुनाव याचिका में त्रिपाठी जी पूरी ताकत के साथ एक्टिव हो जाएंगे। मिश्रा जी जानते हैं कि, यदि त्रिपाठी जी एक्टिव हो गए तो न केवल चुनाव शून्य हो सकता है बल्कि यह भी संभव है कि अगला चुनाव लड़ने का मौका ही ना मिले। इस बात की पूरी संभावना है कि मिश्रा जी को चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। मिश्रा जी का पलड़ा हल्का है, यह इस बात पर भी कहा जा सकता है क्योंकि अब तक मिश्रा जी ने त्रिपाठी जी के आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया है। मिश्रा जी केवल तकनीकी आधार पर त्रिपाठी जी की याचिका खारिज करवाना चाहते थे।
यदि मिश्रा जी को खुद पर भरोसा होता तो अब तक कोर्ट में केस लड़ रहे होते और शायद जीत भी गए होते। जो व्यक्ति लड़ने में डर रहा है, पब्लिक तो यही मानती है कि, वह कमजोर है।

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