ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 29 मार्च 2026: मंगल ग्रह की जमीन पर एक ऐसी चीज दिखाई दी है, जिसको लेकर अंतरिक्ष की वैज्ञानिक बिरादरी में कौतूहल देखा जा रहा है। सेटेलाइट के कमरे में बहुत क्लियर कैप्चर नहीं किया लेकिन जो दिखाई दे रहा है वह समझ में नहीं आ रहा है। यह कोई सिगरेट का टुकड़ा है या बंदूक की गोली, या फिर कुछ और है।
अंतरिक्ष के कुछ वैज्ञानिकों ने इस वस्तु को "Party Hat" के समान वस्तु माना है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एलियन कि मलबे (Alien Debris) का हिस्सा है। जबकि नासा की टीम का मानना इस सबसे कुछ अलग है। नासा के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह चिकनी और धातु जैसी दिखने वाली आकृति मंगल ग्रह की हवाओं (Martian winds) का परिणाम है। नासा के अनुसार, मंगल पर हवाएं पृथ्वी की तुलना में कमजोर होती हैं और इनकी अधिकतम गति लगभग 100 mph (मील प्रति घंटा) दर्ज की गई है, लेकिन ये अरबों वर्षों में पत्थरों को बहुत ही अजीबोगरीब आकार देने में सक्षम हैं।
NASA ने अपने दावे के समर्थन में सबूत भी दिखाए
नासा ने इसे 'परेडोलिया' (Pareidolia) का परिणाम बताया है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें इंसान को किसी भी रैंडम या अस्पष्ट आकृति में जाने-पहचाने पैटर्न (जैसे चेहरा या वस्तु) दिखाई देने लगते हैं। इससे पहले भी मंगल पर निम्नलिखित आकृतियाँ देखी जा चुकी हैं:
समुद्री मूंगे (Coral reef) जैसा दिखने वाला एक छोटा 'फूल'
हार्वर्ड वैज्ञानिक एवी लोएब, NASA से सहमत नहीं
हार्वर्ड के प्रसिद्ध खगोल भौतिकीविद् (Astrophysicist) एवी लोएब (Avi Loeb) नासा के दावों से सहमत नहीं हैं। लोएब का तर्क है कि इस वस्तु की सतह असामान्य रूप से चिकनी और बेलनाकार (Cylindrical) है, जिसके एक तरफ समतल अंत है। उन्होंने इसे "मानव निर्मित मलबा" (Human-made debris) या संभवतः एलियन तकनीक का हिस्सा होने की संभावना जताई है।
आकार को लेकर भी मतभेद है:
नासा का दावा: यह वस्तु मात्र 1 सेंटीमीटर (1 cm) की है, जो एक पैसे के सिक्के से भी छोटी है।
एवी लोएब का अनुमान: लोएब के अनुसार यह लगभग 20 सेंटीमीटर (20 cm) की होनी चाहिए।
मिशन की लागत
इस वस्तु की तस्वीरें लेने वाले Curiosity Rover मिशन की कुल लागत लगभग $2.5 बिलियन डॉलर्स है।भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग ₹21,000 करोड़ रुपये (₹210 अरब) के बराबर बैठती है।
मजे की बात यह है कि, लोएब ने नासा को अपने दावों को साबित करने की चुनौती दी है। फिलहाल, नासा का कहना है कि उन्होंने 13 फीट की दूरी से इस आकृति की फोटो ली थी और यह मंगल के प्राकृतिक वातावरण का ही हिस्सा है। क्या यह वास्तव में कोई ब्रह्मांडीय कचरा (Space debris) है या प्रकृति की कलाकारी, यह आने वाले समय में स्पष्ट हो पाएगा।

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