जबलपुर, 23 मार्च 2026: मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण के लिए चल रही लड़ाई का क्लाइमेक्स शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट से वापस आने के बाद हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश में आज पहली बार इस मामले में सुनवाई हुई और एक बड़ा फैसला हुआ।
OBC Reservation Row in MP: High Court Decision Signals Beginning of Final Phase
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 19 फरवरी को ओबीसी आरक्षण से जुड़े हुए सभी मामले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस कर दिए गए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया था कि 3 महीने के अंदर इस मामले को गुण दोष के आधार पर डिसाइड किया जाए। इसके लिए आवश्यकता होने पर विशेष बेंच का गठन किया जाए। बाद आज 23 मार्च को हाई कोर्ट में मुख्य न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा तथा जस्टिस श्री विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा पहली सुनवाई की गई।
ओबीसी आरक्षण के विरुद्ध दायर याचिका के अधिवक्ता अदितिया संघी ने कोर्ट को बताया की याचिका क्रमांक 5901/2019 लीड पिटीशन हैं, जिसमे हाईकोर्ट ने पिछली कई सुनवाई करके पारित अंतरिम आदेश दिनांक 19/03/2019 को लागू किया गया है तब मध्य प्रदेश शासन की ओर से नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर (वरिष्ठ अधिवक्ता) एवं विनायक शाह तथा हस्तक्षेपकर्ताओ की ओर से वरुण ठाकुर ने कोर्ट को बताया की, उक्त याचिका को लीड पिटीशन ट्रीट नहीं किया जा सकता, क्योंकि याचिका क्रमांक 5901/2019 मे ओबीसी आरक्षण का अध्यादेश दिनांक 08/03/2019 को चुनौती दी गई हैं जो समाप्त हो चूका हैं, तत्पश्चात दिनांक 14/07/2019 को विधान सभा द्वारा विधिवत कानून बन चुका है जिस पर कोई स्टे नहीं हैं। इसलिए उक्त याचिका सारहीन हो चुकी जिसे निरस्त किया जाए।
कोर्ट को अवगत कराया गया कि उक्त याचिका के चारों याचिकाकर्ता MBBS तथा MD की डिग्री लेकर अपने स्वयं के अस्पताल संचालित कर रहे एवं याचिका क्रमांक 5901/2019 को जनहित याचिका के तौर पर ग्राह नहीं किया जा सकता। विशेष अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट मे मध्य प्रदेश शासन की ओर से ऐतिहासिक अभिलेख दाखिल किया गया हैं, वो अभिलेख माननीय हाईकोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध याचिकाओं मे सलंगन नहीं हैं, तब हाईकोर्ट ने कहा कि आपके पास उपलब्ध हैं, तो उसे डिजिटल फार्म मे दाखिल कर दो सुनवाई के दौरान कंसीडर किया जाएगा।
मुख्य न्यायधीश द्वारा हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देशित किया, ओबीसी आरक्षण के समस्त मामले दिनांक 02/04/2026 को एक साथ सूचीबद्ध किया जाए। खंडपीठ द्वारा सभी अधिवक्ताओं को निर्देशित किया की जिसे जो भी दस्तावेज आदि दाखिल करना हो 15 अप्रेल के पूर्व दाखिल किए जाए तथा मामलो की 15 अप्रेल से नियमित सुनवाई की जाकर 2 माह के अंदर डिसाइड किए जाएगे।

.webp)