भोपाल, 21 मार्च 2026: मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह द्वारा स्पष्ट रूप से इनकार कर दिए जाने के बाद शासकीय शिक्षक संगठन ने स्वयं अपनी दम पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का फैसला लिया है। इधर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विशेष पात्रता परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। इसके कारण लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है।
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि मध्य प्रदेश के शिक्षकों की टीईटी परीक्षा जबरन कराने के स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में चुनौती दी जाएगी। संगठन ने 2013 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक और गुरुजियों को इस परीक्षा से बाहर करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में प्रकरण लगाने के लिए सभी तैयारियां नई दिल्ली में पूरी की हैं।
सीनियर अधिवक्ता एसके गांगेले शिक्षकों की तरफ से केस लड़ेंगे
शासकीय शिक्षक संगठन के नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के संभागीय अध्यक्ष राजेश पांडे के नेतृत्व में संगठन की टीम ने प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय के सीनियर अधिवक्ता एसके गांगेले (पूर्व न्यायाधीश मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय) से विस्तार से चर्चा कर सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। संगठन की विधि टीम दिल्ली में रहकर लगातार काम कर रही है।

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