मध्य प्रदेश मालामाल होने वाला है, जीएसडीपी पंहुचेगी 18.48 लाख करोड़ रुपए

Updesh Awasthee
भोपाल, 22 मार्च 2026 
: मध्य प्रदेश को उसके लंबे संघर्ष का परिणाम मिलने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के Industrialization drive का असर दिखाई देने वाला है। सरकार के औद्योगीकरण अभियान का परिणाम यह हुआ कि मध्य प्रदेश राज्य का सकल घरेलू उत्पादन (Gross State Domestic Product) बढ़ने लगा है। सरकार के वित्तीय विशेषज्ञ उत्साहित हैं और उन्होंने अनुमान लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्य प्रदेश राज्य की अर्थव्यवस्था 18.48 लाख करोड रुपए तक पहुंच जाएगी। 

जीएसडीपी का क्या मतलब होता है, सरल हिंदी में समझते हैं 

जीएसडीपी (GSDP) का पूरा नाम सकल राज्य घरेलू उत्पाद (Gross State Domestic Product) होता है। यह किसी भी राज्य के विकास को नापने का सिग्नल होता है। इसके अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष में सभी प्रकार के फसल और कारखाने में बनने वाले प्रोडक्ट एवं सभी प्रकार की सेवाओं का कुल बाजार मूल्य नापा जाता है। सभी राज्यों की GSDP का कुल योग देश की GDP होता है। मध्य प्रदेश के मामलों में GSDP में वृद्धि का मतलब है, मध्य प्रदेश में फसलों का उत्पादन, कारखाने में वस्तुओं का प्रोडक्शन और मध्य प्रदेश के सर्विस सेक्टर (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, पर्यटन इत्यादि) में वृद्धि हो रही है। जरूरी नहीं है कि सभी में एक समान वृद्धि हो रही हो लेकिन, यह निश्चित हो गया है कि इन सभी के कुल टोटल में वृद्धि हो रही है। बिल्कुल सरल शब्दों में कहें तो मध्य प्रदेश मालामाल होने जा रहा है, क्योंकि मध्य प्रदेश की कमाई बढ़ रही है।

Madhya Pradesh Set for Economic Boom, GSDP to Reach ₹18.48 Lakh Crore

मध्य प्रदेश सरकार के वित्तीय विशेषज्ञों ने बजट प्रावधानों को देखते हुए उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान लगाया है। वर्ष 2025-26 में जीएसडीपी 16.48 लाख करोड़ रुपये रही जो अब बढ़ रही है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये के बजट में विकास, सामाजिक सुरक्षा और अधोसंरचना विस्तार को केंद्र में रखा है। सरकार के प्रयासों से स्पष्ट है कि वित्तीय वर्ष के अंत में 44 करोड़ रुपये का राजस्व आधिक्य (Revenue Surplus) रहेगा। 

बजट में अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए 80 हजार 266 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है। यह राज्य के जीएसडीपी का 4.80 प्रतिशत है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों, शहरी अधोसंरचना और ग्रामीण विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी। 

विकास योजनाओं को गति देने के लिए कई प्रमुख विभागों के आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। ग्रामीण विकास विभाग के बजट में 37 प्रतिशत, नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 16 प्रतिशत, महिला एवं बाल विकास विभाग में 26 प्रतिशत, राजस्व विभाग में 43 प्रतिशत और स्कूल शिक्षा विभाग में 11 प्रतिशत की वृद्धि होगी। आगामी वर्ष में ग्रामीण आधारभूत संरचना, शहरी सुविधाओं और सामाजिक क्षेत्र को मजबूत बनाया जाएगा।

किसान समृद्धि
इस वर्ष कृषि और किसानों के कल्याण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 88 हजार 910 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। गैर-बजटीय संसाधनों को सम्मिलित करने पर इस क्षेत्र के लिए कुल लगभग 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि गतिविधियों को आधुनिक बनाने  में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। 

महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की प्रमुख योजना लाड़ली बहना योजना के लिए इस बजट में लगभग 23 हजार 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वीबीजी राम जी योजना के लिए लगभग 10 हजार 400 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए लगभग 5 हजार 500 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए लगभग 4 हजार 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आगामी सिंहस्थ आयोजन की तैयारियों के लिए भी लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित है। 

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए इस वर्ष 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वहीं सामाजिक और आर्थिक उत्थान से जुड़ी योजनाओं के लिए 1 लाख 83 हजार 708 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 26 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 17 प्रतिशत राशि निर्धारित है। 

बजट में नई दीर्घकालिक योजनाओं की भी घोषणा की गई है। द्वारका योजना के तहत अगले तीन वर्षों में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। स्वामित्व योजना के लिए 3 हजार 800 करोड़ रुपये तथा यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन गतिविधियों को बल मिलेगा। 

राज्य की राजकोषीय स्थिति के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियां 3 लाख 8 हजार 703 करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जबकि पूंजीगत प्राप्तियां 80 हजार 694 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। 

वर्ष 2026-27 में अधोसंरचना विकास, कृषि सशक्तिकरण, महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को गति देने के साथ राज्य की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की रणनीति पर काम होगा। विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
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