10 लाख स्क्वायर फीट सरकारी जमीन को प्राइवेट कर दिया, नायब तहसीलदार सहित 7 के खिलाफ मामला दर्ज

Updesh Awasthee
शिवपुरी, 19 मार्च 2026:
शिवपुरी जिले की करैरा तहसील के दिनारा थाना क्षेत्र में नायब तहसीलदार और पटवारी सहित कुल 7 कर्मचारियों ने मिलकर 10 लाख स्क्वायर फीट सरकारी जमीन को प्राइवेट कर दिया। खुलासा तो तब हुआ जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर की वाइफ ने इस जमीन में इन्वेस्टमेंट किया और उनके खिलाफ मामला दर्ज हो गया। कलेक्टर की इन्वेस्टीगेशन में जमीन की कीमत 150 करोड़ बताई गई है। इन्वेस्टिगेशन में दोषी पाए गए नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव सहित 7 कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

Corruption Case Filed Against Ashok Shrivastava in Karera - Probe Begins

बता दें कि जरगवां अव्वल में कोटा-झांसी फोरलेन हाइवे किनारे चौकी के पीछे खसरा नंबर 247 के नए सर्वे नंबर बनाकर 9.39 हेक्टेयर (करीब 47 बिस्वा) जमीन का निजी नामों पर चढ़ा दी गई। डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक बिना सक्षम अनुमति के सर्वे नंबर बनाए गए। पटवारी धाकड़ की वेब-जीआईएस आईडी से रिकॉर्ड में बदलाव हुआ। नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव की आईडी का भी उपयोग हुआ। सरकारी खसरा नंबर 247 की जमीन के नए सर्वे नंबर बनाए गए हैं। राजस्व रिकार्ड में 9.39 हेक्टेयर जमीन पांच महिलाओं के नाम दर्ज है। 
सिविल लाइन झांसी निवासी प्रियांशी पत्नी वैभव अग्रवाल और छाया पत्नी विनोद अग्रवाल के नाम सर्वे नंबर 247/12  रकबा 1.00 हेक्टेयर, 247/11 रकबा 1.00 हेक्टेयर, 247/10/2 रकबा 1.80 हेक्टेयर, 247/10/1 रकबा 0.20 हेक्टेयर, 247/9 रकबा 1.00 हेक्टेयर, 247/7 रकबा 1.00 हेक्टेयर कुल 6 हेक्टेयर जमीन दर्ज है। इसी तरह:- 
ग्राम जरगंवा अव्वल निवासी रामवती पुत्री भबूत सिंह खंगार सर्वे नंबर 247/3 रकबा 1.39 हेक्टेयर, 
भगवती पुत्री प्रतापसिंह यादव सर्वे नंबर 247/5 रकबा 1.00 हेक्टेयर और 
धनकू पत्नी आशाराम खंगार के नाम से सर्वे नंबर 247/6 रकबा 1.00 हेक्टेयर जमीन दर्ज है।

सबसे पहले बीएमओ  डॉ. प्रदीप शर्मा की पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था 

तत्कालीन बीएमओ डॉ. प्रदीप शर्मा की पत्नी श्वेता शर्मा ने ग्राम जरगंवा की दो जमीनें खरीदी थीं। पिछले साल उन्होंने यह जमीन व्यापारी उमेश गुप्ता को बेच दी। नामांतरण के आवेदन पर जमीन विक्रय से वर्जित पाई गई और रजिस्ट्री निरस्त कर दी गई। व्यापारी ने एफआईआर दर्ज कराई, जबकि श्वेता ने कलेक्टर से शिकायत की। जांच में बाबू लोकेंद्र श्रीवास्तव, पटवारी बृजेश यादव और नायब तहसीलदार जिम्मेदार पाए गए।

फर्जी सर्वे नंबर के साथ रकबा भी बढ़ा दिया

जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 247 का असली रकमा 9.79 हेक्टेयर है। इसमें से 9.39 हेक्टेयर जमीन फर्जी सर्वे नंबर बनाकर निजी नामों पर दर्ज कर दी गई। इसके अलावा, खसरे का रकबा 0.60 हेक्टेयर बढ़ा दिया गया। कुल मिलाकर करीब 10.10 लाख वर्गफीट जमीन का मूल्यांकन किया गया, जिसकी कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यह फर्जीवाड़ा सरकारी रिकॉर्ड और जमीन के वास्तविक रकबे में अंतर के कारण उजागर हुआ।

जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने करैरा तहसील के बाबू जीवन लाल तिवारी (सेवानिवृत्त), रिकॉर्ड शाखा प्रभारी प्रताप पुरी, नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव, प्रवाचक लोकेन्द्र श्रीवास्तव, सहायक ग्रेड-3 (नकल शाखा) दिवंगत लालाराम वर्मा, हल्का पटवारी बृजेश यादव और दिवंगत पटवारी मुकेश चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। 
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