लीगल न्यूज डेस्क, 20 मार्च 2026 : हाई कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश श्री अजय मोहन गोयल ने सरकार को आदेश दिया है कि वह ऐसी पॉलिसी बनाएं जिसके कारण किसी भी सरकारी कर्मचारियों को अपने गृह जिले में 3 साल से अधिक नियुक्त रहने का मौका ना मिले और एक बार उसका ट्रांसफर हो गया तो फिर उसे दूसरी बार गृह जिले में ट्रांसफर नहीं किया जाए।
High Court Rules: Govt Employees Should Not Be Transferred to Home District Twice
यह मामला हिमाचल प्रदेश की हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत हुआ था। जिसमें राज्य स्तर के कर्मचारियों की ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर विवाद था। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार की तबादला नीति की समीक्षा करते हुए निर्देश जारी किए:-
- सरकारी कर्मचारी का ट्रांसफर उसकी वर्तमान पोस्टिंग से कम से कम डेढ़ सौ किलोमीटर दूर किया जाना चाहिए।
- ट्रांसफर पॉलिसी और ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होनी चाहिए। यहां तक की डैशबोर्ड पर यह भी दिखाई देना चाहिए कि कर्मचारियों ने अब तक किन स्थानों पर काम किया है।
- ऐसा ऑनलाइन सिस्टम बनाया कि एक कर्मचारी को यदि एक स्थान पर स्थापना मिल चुकी है तो फिर दूसरी बार वहां पर उसका ट्रांसफर ही ना हो पाए।
- खास तौर पर गृह जिले में किसी भी कर्मचारी को दोबारा काम करने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
- तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को एक स्थान पर अधिकतम 3 साल और प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को एक स्थान पर 2 साल से अधिक पदस्थापना नहीं दी जानी चाहिए।
कर्मचारियों को घर के पास पदस्थापना पाने का अधिकार नहीं
अदालत ने आदेश की प्रति शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, आईपीएच और लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिवों को भी भेजने को कहा है, क्योंकि अधिकतर तबादले इन्हीं विभागों में होते हैं। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा कि यह चिंता का विषय है कि कई कर्मचारी अपनी नियुक्ति वाली जगह पर ही लंबे समय तक बने रहना चाहते हैं और दूसरी जगह जाने से बचते हैं। इससे विभागीय कामकाज प्रभावित होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य कैडर का कोई भी कर्मचारी यह नहीं मान सकता कि उसे अपने घर के पास ही नौकरी करने का कोई अधिकार है।

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