भोपाल समाचार, 29 मार्च 2026: क्या आपको पता है अंग्रेजों के आने से पहले भारत में कोई कानून और अदालत नहीं थी। यदि कोई अपराध करता था तो लोग आपस में बैठकर मामला निपटा लिया करते थे। आजादी के 79 साल बाद भी ऐसा ही होता है लेकिन तब जब अपराधी पावरफुल हो। उज्जैन के नागदा में राज्यपाल का पोता सरकारी अस्पताल से सरे आम कंप्यूटर लूट कर ले गया। सबूत तो है ही, उसने खुद ने स्वीकार किया है कि हां मैं कंप्यूटर ले गया था, लेकिन कानून की दिव्यांगता देखिए, इसके बाद भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि कोई शिकायत करने की हिम्मत ही नहीं कर पा रहा है।
Governor’s Grandson Accused of Taking Computer from Govt Hospital, Staff Fear Speaking Out
यह मामला मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और आजकल कर्नाटक के राज्यपाल डॉक्टर थावरचंद गहलोत के प्रपोत्र मनीष गहलोत का है। घटनास्थल है नागदा का सिविल अस्पताल। घटना दिनांक 25 मार्च दोपहर तीन चार बजे के बीच की बताई जा रही है। सबूत के तौर पर CCTV कैमरे की वीडियो रिकॉर्डिंग है, जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। सरकारी अस्पताल के कंप्यूटर रूम नंबर 23 में से एक व्यक्ति कंप्यूटर की सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट CPU लेकर जाता हुआ दिखाई दे रहा है। इसी में कंप्यूटर का पूरा डाटा होता है। इस व्यक्ति के साथ श्री मनीष गहलोत भी दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि इस कंप्यूटर में सीएम हेल्पलाइन का पूरा डाटा भरा हुआ था। यानी कि श्री मनीष गहलोत ने सीएम हेल्पलाइन का डाटा लूट लिया। पावर का नशा देखिए। जब पत्रकारों ने श्री मनीष गहलोत से पूछा तो उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि हां डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ से बातचीत के दौरान बात बिगड़ने लगी थी इसलिए मैं कंप्यूटर उठा कर ले गया था।
इतना बड़ा कांड हो गया लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया
इतना बड़ा अपराध हो गया लेकिन पुलिस थाने में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। मजे की बात देखिए, यदि कोई व्यक्ति शराब के नशे में चौराहे पर उपद्रव कर रहा हो, तो पुलिस बिना किसी शिकायत का इंतजार किए, ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेती है, लेकिन सरकारी अस्पताल से कंप्यूटर लूट लिया गया, CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग वायरल हो रही है लेकिन पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया। जब पत्रकारों ने थाना प्रभारी श्री जितेंद्र पाटीदार से इसके बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि हमें तो अब तक कोई शिकायत मिली नहीं है। यदि मिलेगी तो कार्रवाई करेंगे।
इसका मतलब हुआ कि यदि शिकायत नहीं मिलेगी तो कार्रवाई भी नहीं करेंगे। सवाल यह है कि क्या मीडिया में प्रकाशित हो रहे समाचार, और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है वीडियो, संज्ञान के लिए काफी नहीं है। यदि फरियादी डर जाए तो क्या पुलिस अपराधी को स्वतंत्र रहने देगी। पुलिस का काम अपराध को रोकना और अपराधी को पकड़ना है, चाहे कोई शिकायत करें या ना करें।
मैं तो छुट्टी पर था: ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर
सिविल अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है, झूठ नहीं बोल सकते लेकिन फिर भी नगर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर श्री शिवराज कौशल कहते हैं कि, घटना वाले दिन में तो छुट्टी पर था।
सवाल तो बनता है कि यदि कोई अधिकारी छुट्टी पर था और उसके ऑफिस में कोई अपराध हो जाए, तो क्या वह इसलिए अपने कर्तव्य का पालन नहीं करेगा क्योंकि वह छुट्टी पर है, और छुट्टी से लौट के बाद भी अपराध की जानकारी पुलिस को नहीं देगा। क्या छुट्टी पर रहने वाले अधिकारी की सभी जिम्मेदारियां खत्म हो जाती हैं। जब बीएमओ को छुट्टी से लौट के बाद पता चला कि यह घटना हुई थी, तो फिर उन्होंने पुलिस को सूचना क्यों नहीं की।
CMHO न्यायाधीश बन गए, बिना कानूनी कार्रवाई के मामला सुलटा दिया
दैनिक भास्कर में उज्जैन के सीएमएचओ श्री अशोक पटेल का बयान छपा है, उन्होंने भास्कर के पत्रकार को बताया कि, मामला संज्ञान में आया था। मैंने बीएमओ को तत्काल कार्रवाई को निर्देशित किया। पता चला था कि युवक सीपीयू उठा कर ले जा रहा है। समझाइश दी गई जिसके बाद कंप्यूटर लौटा दिया है।
सवाल तो यह भी बनता है, CMHO को क्रिमिनल केस सुल्टाने का अधिकार किसने दिया। जब कम है चुने बीएमओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे, तो निर्देश में क्या कहा था। BMO ने तो कानूनी कार्रवाई की नहीं और CMHO क्रिमिनल के खिलाफ कार्रवाई करने के स्थान पर क्राइम में शामिल हो गए। मंडोली करने लगे।
पुलिस अधीक्षक महोदय, कानून अपना काम करेगा या नहीं?
घटना का पूरा विवरण पब्लिक डोमेन में आ गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या, उज्जैन के पुलिस अधीक्षक महोदय इस मामले को संज्ञान में लेते हैं। क्या सिविल अस्पताल के स्टाफ और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को पूछताछ के लिए पुलिस थाने बुलाया जाएगा। क्या नागदा में बाहुबली बन रहे राज्यपाल के पोते को पूछताछ के लिए थाने में बुलाया जाएगा। क्या मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो के आधार पर मामला दर्ज करके इन्वेस्टिगेशन की जाएगी?
क्या राज्यपाल के पोते के खिलाफ, सरकारी दफ्तर में विवाद करने, शासकीय कार्य में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति को लूटने का मामला दर्ज किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल, क्या कांग्रेस पार्टी विपक्ष की जिम्मेदारी निभाएगी। क्या ऐसा कुछ करेगी कि कानून को अपना काम करना पड़े। या फिर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी बयान जारी करेंगे और कुणाल चौधरी किसी फार्म हाउस की तरफ रवाना हो जाएंगे?

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