महोदय, उपर्युक्त विषयांतर्गत निवेदन है कि मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग के सभी वृत्त/वनमण्डल/ उपवनमण्डल/परिक्षेत्र स्तर के कार्यालयों में विगत अनेक वर्षों में हजारों व्यक्तियों को बिना विधिवत, पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया के अवैध रूप से कम्प्यूटर कार्य हेतु रखा गया है। इन कम्प्यूटर श्रमिकों को नियमों के विपरीत अवैध रूप से जॉबदर पर रखा गया है।
यहां सर्वाधिक गंभीर तथ्य यह है कि अपारदर्शी और बिना विधिवत चयन प्रक्रिया (लेन-देन/सेटिंग) के माध्यम से कम्प्यूटर के कार्य पर रखे गये इन कम्प्यूटर श्रमिकों/वर्करों को सभी प्रकार के विभागीय पत्राचारों एवं अभिलेखों में स्थाई पदनाम ‘‘कम्प्यूटर ऑपरेटर’’ से सम्बोधित किया जा रहा है। जो कि न केवल पूर्णतः नियम विरूद्ध एवं भ्रामक है बल्कि कम्प्यूूटर ऑपरेटर पदनाम से सम्बोधित किया जाना वन विभाग के अधिकारियों द्वारा जानबूझकर एवं षडयंत्र पूर्वक उन कम्प्यूटर श्रमिकों के स्थाईकरण/नियमितिकरण की मांग को आधार एवं बल प्रदान करने हेतु प्रशासनिक रिकॉर्ड तैयार करता हुआ प्रतीत हो रहा है।
नियमानुसार कम्प्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति हेतु समाचार पत्रों में विज्ञापन एवं अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाकर नियुक्ति की जाती है, किन्तु वन विभाग में इस अनिवार्य प्रक्रिया का पूर्णतः उल्लंघन कर मनमाने ढंग से संबंधित वन अधिकारियों द्वारा संबंधवाद/आर्थिक लाभ प्राप्त कर अवैध नियुक्तियां की गई हैं। जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 (नौकरी/सेवा में समान अवसर) के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है तथा योग्य एवं पात्र बेरोजगार युवाओं के हित प्रभावित हुए हैं।
वन विभाग में की जा रही इस प्रकार की अवैध और अपारदर्शी नियुक्तियां वर्तमान में नियमितीकरण एवं अन्य आर्थिक लाभ की अनुचित मांगों को जन्म दे रही हैं और वन विभाग के अधिकारियों द्वारा दबाव में आकर इनकी मांगों पर कार्यवाही भी की जा रही है।
जिससे शासन पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ेगा। जबकि मध्यप्रदेश शासन के सेवा भर्ती नियमों के अनुसार बिना विज्ञापन एवं बिना चयन प्रक्रिया की नियुक्ति अवैध एवं शून्य मानी जाती है। इस प्रकार की अवैध नियुक्तियां उन बेरोजगार युवाओं के साथ सर्वाधिक अन्याय है, जो शासन से पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के साथ रोजगार पाने की अपेक्षा रखते हैं। ऐसी स्थितियां तब और भयावह हो जाती है जब असंतुष्ट और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से रोजगार प्राप्त करने की अपेक्षा रखने वाले समस्त बेरोजगार युवा शासन-प्रशासन के विरूद्ध आंदोलनों पर उतर आते हैं।
अतएव वन विभाग में अवैध रूप से नियम विरूद्ध रखे गये कम्प्यूटर श्रमिकों को ‘कम्प्यूटर ऑपरेटर’ के स्थान पर 'जॉबदर कम्प्यूूटर श्रमिक' के रूप में ही सम्बोधित किए जाने हेतु स्पष्ट निर्देश जारी करवाने का कष्ट करें तथा इनकी सेवाओं को अधिकतम 11 माह की अवधि तक सीमित रखने व समय-समय पर इनकी सेवाऐं समाप्त करने हेतु स्पष्ट आदेश/निर्देश जारी करवाने का कष्ट करें। जिससे ये अवैध अस्थाई नियुक्तियां भविष्य में नियमितीकरण अथवा अन्य आर्थिक लाभ की अनुचित मांगों को जन्म न दें। जिससे योग्य एवं पात्र बेरोजगार युवाओं के हित प्रभावित न हो कर शासन की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता बनी रहे।
पत्र लेखक:- जितेन्द्र शर्मा official.jitendrasharma@gmail.com
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