मध्य प्रदेश का पहला सरकारी IVF सेंटर भोपाल में, 3 लाख नहीं सिर्फ ₹50000 में

Updesh Awasthee
भोपाल, 6 मार्च 2026
: संतान कितना मुश्किल और महंगी होती है, यह बात संतानहीन दंपतियों से पूछिए। प्राइवेट सेक्टर के आईवीएफ सेंटर में लगभग 3 लाख रुपए का खर्चा आता है। यानी लोअर मिडल क्लास दो संतान का सपना भी नहीं देख सकता लेकिन अब प्रॉब्लम नहीं है। भोपाल में सरकारी आईवीएफ सेंटर खुलने जा रहा है। इसमें सिर्फ ₹50000 खर्चा आएगा। 

First Government IVF Centre of Madhya Pradesh Established in Bhopal

एम्स भोपाल में प्रदेश का पहला सरकारी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) सेंटर मार्च के अंतिम सप्ताह से शुरू होने जा रहा है। दिल्ली और रायपुर के बाद एम्स भोपाल देश का तीसरा ऐसा सरकारी संस्थान होगा, जहां यह सुविधा मिलेगी। वर्तमान में प्रदेश के करीब 10 हजार दंपती हर साल निजी सेंटरों पर आईवीएफ कराते हैं, जहां एक साइकिल का खर्च 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक आता है। एम्स में यही इलाज महज 50 हजार से 80 हजार रुपए में उपलब्ध होगा।

इसके पीछे किसी नेता यार राज्य सरकार का कोई योगदान नहीं है। केंद्र ने इस सेंटर को 20 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया है। यहां अत्याधुनिक लैब, एम्ब्रियो फ्रीजिंग और हाई-एंड इन्क्यूबेटर स्थापित किए गए हैं। डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए डिजिटल स्किल लैब बनाई गई है, जिसमें एआई आधारित सिम्युलेटर की मदद से भ्रूण ट्रांसफर व हिस्टेरोस्कोपी का अभ्यास किया जा सकेगा।

दिसंबर में तकनीकी परीक्षण पूरा हो चुका है। एम्स के डायरेक्टर डॉ. माधवानंद कर बोले- इससे आर्थिक रूप से कमजोर दंपतियों के भी सपने पूरे होंगे। 

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