भोपाल की दलित महिला की ​Morality को सलाम; झूठा एट्रोसिटी केस नहीं, प्रेमी के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया

Updesh Awasthee
भोपाल, 20 मार्च 2026:
आज के जमाने में जब आईएएस अधिकारी भी अपनी जाति का फायदा उठाने के लिए नैतिकता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है वहीं दूसरी ओर एक निर्धन दलित महिला ने अपने ही प्रेमी के खिलाफ इसलिए मामला दर्ज करवा दिया क्योंकि वह चाहता था कि, महिला एक निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ झूठ एट्रोसिटी एक्ट का मामला दर्ज करवाए। ऐसी महिलाओं की नैतिकता को सलाम करना चाहिए। 

Bhopal Woman Refuses to File False Atrocity Case, Chooses Integrity Over Pressure

यह मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद इलाके का है। महिला विवाहित है लेकिन उसका पति एक आपराधिक गतिविधि में संदिग्ध होने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया है और जेल में बंद है। उसके पास वकील की महंगी फीस देने के लिए पैसा नहीं है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए महिला एक सिक्योरिटी एजेंसी में काम करती है। महिला का बेटा बड़ा हो गया है और विवाह के योग्य हो गया था। महिला ने एक सिक्योरिटी गार्ड की पुत्री से अपनी बेटे की शादी की, और इतनी परेशानियों के बावजूद एक सुखी परिवार बनाने की कोशिश कर रही है। 

इधर लड़की का सिक्योरिटी गार्ड बाप, एक आपराधिक मानसिकता का व्यक्ति है। वह ऐसे अपराध करता है जो ग्रे लाइन पर होते हैं। मतलब आपको दिखाई तो देता है कि उसने गलत किया लेकिन कानून की किताब में ऐसे गलत काम के लिए सजा का निर्धारण नहीं है। सिक्योरिटी गार्ड ने अपनी बेटी की सास (जिसका सम्मान करना चाहिए) को फुसलाते हुए यह समझा दिया कि, तुम्हारा पति अब कभी जेल से बाहर नहीं निकल पाएगा। फिर उसकी मदद करने के बहाने उसके नजदीक आया और उसके साथ फिजिकल रिलेशन बना लिए। 

फिजिकल रिलेशन बन जाने के बाद सिक्योरिटी गार्ड, महिला को बहकाने लगा कि ऐसे मेहनत करके हम कभी अपने जीवन के सपने पूरे नहीं कर पाएंगे। अपने दलित होने का फायदा उठाओ। अपनी सिक्योरिटी एजेंसी के मालिक से झगड़ा करो और फिर उसके खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट का मामला दर्ज करवा दो। बाद में समझौते के नाम पर बड़ी रकम मिलेगी। 

मध्य प्रदेश में इस तरह के कई मामले सामने आते हैं। एट्रोसिटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले ज्यादातर मामलों में, कोर्ट में फाइनल अरगुमेंट से पहले, मामला दर्ज करवाने वाली महिला पलट जाती है या फिर अनुपस्थित हो जाती है। साफ समझ में आता है कि दोनों पक्षों के बीच में डील हो गई है। कई बार तो न्यायाधीश को भी पता होता है कि क्या हो गया है और किस लिए मामला दर्ज करवाया गया था। लेकिन इस तरह की डील को रोकने के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया ही नहीं है। 

सिक्योरिटी एजेंसी पर नौकरी करके बड़ी मुश्किल से अपने परिवार का पालन पोषण करने वाली गरीब और दलित महिला ने नैतिकता की वह मिसाल पेश की, जिसको इतिहास में कभी दर्ज नहीं किया जाएगा लेकिन दुनिया में कुछ लोग हमेशा याद रखेंगे। महिला ने किसी भी निर्दोष व्यक्ति को एट्रोसिटी एक्ट के झूठे मामले में फंसाने से मना कर दिया, और दूसरों को ब्लैकमेल करने के लिए प्रेशर क्रिएट करने वाले अपने ही प्रेमी के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया। 
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