एम्स भोपाल के डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह, रिश्वतखोरी के केस को रिश्वत देकर बंद करवाने की कोशिश

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 4 मार्च 2026
: यह भी अपने आप में गजब है। एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह को सीबीआई ने रिश्वतखोरी के केस में गिरफ्तार किया था। उन्होंने ऐसा चक्कर चलाया कि, रिश्वतखोरी का केस, रिश्वत देकर बंद करवा दिया। ईमानदारी की प्रतिमूर्ति संस्था सीबीआई के इंस्पेक्टर रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई लेकिन कोर्ट ने इस परंपरा को आगे नहीं बढ़ने दिया और क्लोजर रिपोर्ट को रद्द कर दिया। 

CBI की डीए जांच में ऐसा चक्कर चलाया कि...

इस कहानी की शुरुआत 25 सितंबर 2021 को हुई, जब एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह को एक फार्मासिस्ट से 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया था। इसके बाद हुई डीए जांच में शुरुआती चरण में बताया गया था कि, आरोपी की संपत्ति, उसकी ज्ञात आय से 87.32% ज्यादा है। क्लोजर रिपोर्ट तक आते-आते सीबीआई का कैलकुलेटर ऐसा बदला कि यह संपत्ति आय से 3.32% कम (माइनस में) दिखाई गई। इसी “जादुई’ बदलाव पर अदालत ने आपत्ति जताई है।

CBI वालों ने लॉकर की चाबी मिल गई थी फिर भी नहीं खोला

अदालत ने दर्ज किया कि आरोपी की पत्नी की ट्यूशन आय को बिना किसी ठोस दस्तावेज के आय में जोड़ दिया गया। वहीं, तलाशी के दौरान मिले सोने के गहनों और बैंक लॉकर की चाबी को लेकर जांच एजेंसी ने रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी। कोर्ट ने साफ कहा कि जब लॉकर की चाबी मिली थी, तो उसे ऑपरेट क्यों नहीं किया गया? फ्लैट की रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और बैंक लोन के ब्याज का हिसाब भी कागजों में मेल नहीं खा रहा है।

नर्सिंग कॉलेजों की जांच में जो इंस्पेक्टर घूस लेते पकड़ा गया था, उसी ने की थी जांच : 

खास बात है कि, एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह के मामले की जांच उसी सीबीआई इंस्पेक्टर द्वारा की गई थी, जो मध्य प्रदेश नर्सिंग घोटाले की जांच कर रहे थे, और रिश्वत लेते हुए रहेंगे हाथों पकड़े गए थे। इनके ऊपर अनफिट नर्सिंग कॉलेजों को क्लीन चिट देने का आरोप लगा है। रिश्वत लेते हुए इनको गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल जेल में हैं। इनका नाम राहुल राज बताया गया है।

CBI की जांच में क्या गड़बड़ी की गई

  • तलाशी में लॉकर की चाबी मिली, लेकिन जांच रिपोर्ट में यह डिटेल नहीं है कि, लॉकर में क्या मिला। 
  • डॉक्टर के सेविंग अकाउंट में जो पैसा मिला, उसको उनकी पत्नी की ट्यूशन से इनकम बता दिया। जांच रिपोर्ट में यह नहीं बताया की पत्नी किसको ट्यूशन पढ़ाती थी और क्या पढ़ाती थी, और अब क्यों नहीं पढ़ाती।
  • जब्त गहनों और संपत्ति के दस्तावेजों में दर्ज कीमतों में भारी अंतर मिला। उनको अंडर वैल्यू दिखाया गया।
  • बैंक ऋण, ब्याज और स्टांप शुल्क का पूरा विवरण केस डायरी से गायब कर दिया।
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289
Tags

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!