लो जी हो गया 25 लाख की रिश्वत का इंतजाम, महिला बाल विकास में पर्यवेक्षक भर्ती का मामला

Updesh Awasthee
भोपाल, 25 फरवरी 2026
: भ्रष्टाचार की परिभाषा की समीक्षा करने और नए तरीकों को भ्रष्टाचार घोषित करने का समय आ गया है क्योंकि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार करने के तरीके बदल गए हैं। अब महिला बाल विकास विभाग की बात लीजिए। पर्यवेक्षक की भर्ती हमेशा से होती आ रही है, लेकिन इस बार कुछ इस तरीके से पद स्थापना की गई है कि, प्रत्येक कैंडिडेट को मजबूरी में रिश्वत देने ही पड़ेगी। 158 उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई है और मोटा-मोटी 25 लाख की रिश्वत का इंतजाम किया गया है। 

New Method of Bribe in MP Women and Child Development Supervisor Recruitment

यह एक ऐसा भ्रष्टाचार है जो दिखाई तो देता है लेकिन भ्रष्टाचार नहीं कहा जा सकता क्योंकि इस तरह की गतिविधियों को भ्रष्टाचार की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। बात कुछ ऐसी है कि मध्य प्रदेश में महिला बाल विकास विभाग द्वारा पर्यवेक्षकों की भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया। व्यापम घोटाले के बाद परीक्षा के दौरान गड़बड़ी करना और पैसा बनाना मुश्किल और खतरनाक हो गया है। गिरफ्तारी हो जाती है, जेल जाना पड़ता है। इसलिए परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। रिजल्ट आने के बाद पदस्थापना में गड़बड़ी की गई है। पर्यवेक्षक पदों पर महिलाओं की नियुक्ति की जाती है और सामान्य तौर पर ऐसी महिलाओं का चयन किया जाता है, जिनका जीवन यापन के लिए नौकरी की बहुत जरूरत है। इसलिए महिलाओं की नियुक्ति उनके गृह जिले में की जाती है लेकिन इस बार खेला हो गया। 

पर्यवेक्षकों की गृह जिले में नियुक्ति करने का कोई नियम नहीं है। इस बात का फायदा उठाया गया और महिलाओं को उनके गृह जिले से दूर पोस्टिंग दी गई। परिवीक्षा अवधि 3 वर्ष है। नियुक्ति आदेश में कहीं नहीं लिखा की तीन वर्ष तक किसी भी प्रकार का स्थानांतरण नहीं हो सकता है। अब खेल शुरू हो गया है। कैंडीडेट्स यदि अपने गृह जिले में नियुक्ति चाहते हैं तो उनको संचालनालय महिला एवं बाल विकास में संपर्क करना पड़ेगा। इस पूरे खेल में कुछ भी ब्लैक नहीं है लेकिन व्हाइट भी नहीं है। यह सब कुछ ग्रे लाइन पर चल रहा है। मंशा साफ समझ में आ रही है, लेकिन कोई भी यह नहीं कह सकता कि किसी नियम का उल्लंघन किया गया है, लेकिन राजधानी में मोबाइल की घंटी बजने लगी है। लोग नेताओं और पत्रकारों से पूछ रहे हैं, कुछ हो सकता है तो बताइए। 

यह संभावना भी बनी हुई है क्योंकि आदेश में कहीं नहीं लिखा कि कुछ नहीं हो सकता। रास्ता खुला छोड़ दिया गया है। 

सामान्य वर्ग के कैंडिडेट के प्रति कुछ ज्यादा कठोर

यह नियुक्ति आदेश सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के प्रति कुछ ज्यादा कठोर है। अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को उनके घर से औसत 250 किलोमीटर की दूरी पर पोस्टिंग दी गई है परंतु सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की पोस्टिंग कुछ इस तरीके से की गई है कि उनको अपने घर वापस आने में कम से कम 1 दिन का समय लगेगा और कोई डायरेक्ट ट्रांसपोर्ट नहीं मिलेगा। 

सीएम चाहे तो 1 मिनट में न्याय कर सकते हैं

यदि मुख्यमंत्री चाहे तो इस मामले में 1 मिनट में न्याय किया जा सकता है। उम्मीदवारों को चॉइस फिलिंग का ऑप्शन दे दीजिए। यदि उनके गृह जिले में पद रिक्त है तो वहां पर पोस्टिंग मिल जाएगी, यदि पद रिक्त नहीं है तो आसपास के जिले में मिल जाएगी। कैंडिडेट अपने कन्वेंस को देखते हुए चॉइस फिलिंग करेगा। उसकी प्राथमिकता के आधार पर उसको पद स्थापना मिल जाएगी। 
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