Madhya Pradesh में देसी कुत्तों की पुलिस में भर्ती होगी, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 16 फरवरी 2026
: भारत में कुत्ते, मतदाता नहीं है लेकिन एक बड़े वोट बैंक को प्रभावित करते हैं। कुत्तों के साथ लोगों के सेंटीमेंट जुड़े हुए। इसके कारण सुप्रीम कोर्ट तक धर्म संकट में है। कुत्तों से जुड़ी बहुत सारी अच्छी बुरी खबरों के बीच, एक बड़ी खबर यह भी है कि मध्य प्रदेश में देसी कुत्तों की पुलिस में भर्ती होगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि, इस प्रकार का इनोवेशन करके देखना चाहिए। 

आज राजधानी भोपाल में मध्य प्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्कूली बच्चों और कॉलेज स्टूडेंट्स को जंगल और वन्य प्राणियों से कनेक्ट करने वाले प्रोग्राम तेज करने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। इसी दौरान उन्होंने कहा कि, मध्य प्रदेश पुलिस की डॉग स्क्वायड में देसी नस्ल के डॉग्स शामिल किए जाने चाहिए। सीएम चाहते हैं कि यह प्रयोग करके देखा जाए।

मध्य प्रदेश पुलिस की डॉग स्क्वायड के बारे में 

हाल की रिपोर्ट्स (दिसंबर 2025) के अनुसार, मध्य प्रदेश पुलिस डॉग स्क्वायड में कुल 208 कुत्ते हैं, जिनमें से 120 सक्रिय रूप से विभिन्न जिलों में ड्यूटी पर तैनात हैं। प्रदेश के 16 जोनों में डॉग स्क्वायड की मौजूदगी है, जो देश में सबसे ज्यादा स्थानों पर फैली हुई है। ये कुत्ते भोपाल स्थित पुलिस डॉग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (23वीं वाहिनी) में मुख्य रूप से ट्रेन और मैनेज किए जाते हैं।

मध्य प्रदेश पुलिस की डॉग स्क्वायड में कुत्तों की नस्ल

मध्य प्रदेश पुलिस की डॉग स्क्वायड में मुख्य रूप से जर्मन शेफर्ड, बेल्जियन मेलिनोइस (Belgian Malinois) नल के कुत्ते, जो अपनी आक्रामकता, तेजी और स्निफिंग क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं और लैब्राडोर आदि भर्ती किए जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 2021 से देसी कुत्तों (इंडियन स्ट्रीट डॉग्स, मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड आदि) को भी शामिल किया गया है। ये स्लो लर्नर होते हैं लेकिन कम "नखरे" वाले और अनुकूलनीय साबित हो रहे हैं।

मध्य प्रदेश पुलिस डॉग स्क्वायड में कुत्तों की ट्रेनिंग

मध्य प्रदेश पुलिस डॉग स्क्वायड में कुत्तों की ट्रेनिंग आमतौर पर 9-11 महीने की होती है। भोपाल के अलावा ग्वालियर के BSF नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग्स (NTCD) से भी सहयोग मिलता है। कुत्तों को स्निफिंग, ट्रैकिंग, ऑबिडियंस, अटैक और स्पेशलाइज्ड टास्क (जैसे वाइल्डलाइफ क्राइम, नारकोटिक्स) सिखाए जाते हैं।

खास बातें और उपलब्धियाँ: 

बालाघाट में डॉग "ताशा" (डॉबरमैन ब्रीड) ने हैंडलर विनोद शर्मा के साथ मिलकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। हैंडलर की मौत के बाद ताशा ट्रॉमा में चली गई थी (दिसंबर 2025)।
जेल से भागे कैदियों को ट्रैक करना, मर्डर केस, डेटोनेटर्स ढूंढना आदि। पिछले 2 सालों में अकेले 18 केसों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भोपाल में कुत्तों के लिए रिटायरमेंट होम: 

भोपाल के पुलिस डॉग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में रिटायर्ड कुत्तों के लिए "डॉग आश्रम" बनाया गया है, जहां उनकी देखभाल होती है। मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों द्वारा समय-समय पर इनकी ट्रेनिंग और हेल्थ चेकअप की समीक्षा की जाती है।

भारत में मध्य प्रदेश पुलिस डॉग स्क्वायड को काफी प्रोफेशनल और इफेक्टिव माना जाता है, और यह वन्यजीव अपराध, ड्रग्स और आतंकवाद विरोधी कार्यों में भी सहयोग करती है। 
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