भोपाल समाचार, 2 फरवरी 2026: भारत में लेस क्वालिफाइड कैंडिडेट को जाति के आधार पर आरक्षण के माध्यम से क्वालिफाइड कैंडिडेट के बराबर कुर्सी पर बिठाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर क्वालिफाइड कैंडीडेट्स को संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं है। लखनऊ का एक टॉपर इंजीनियर, जिसको नौकरी के लिए इंग्लैंड बुलाया गया था। जब वापस भारत लौट कर आए तो उसे कोई काम नहीं मिला। परिवार को बताया कि जॉब लग गई है और भोपाल में चोरी करने लगा, लेकिन वह तो इंजीनियर है, उसको चोरी करना कहां आता था। पकड़ा गया और जेल भेज दिया गया।
BTech का मेरिट होल्डर था, इंग्लैंड में जॉब लगी थी
जीआरपी भोपाल अपनी पीठ थापथापा रही है, क्योंकि उसने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली है जो राजधानी एक्सप्रेस जैसी हाई प्रोफाइल ट्रेन में AC 1st क्लास में यात्रा करने वाली हाई प्रोफाइल महिलाओं को टारगेट करता था। पकड़े गए युवक का नाम प्रांजल दीक्षित है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का रहने वाला है। उसके पिता एक सभ्य नागरिक हैं और वह खुद BTech का मेरिट होल्डर स्टूडेंट था। कैंपस सिलेक्शन हुआ था और बढ़िया नौकरी लग गई थी। इतना अच्छा काम करता था कि कंपनी ने इंग्लैंड बुला लिया था।
झूठ बोलना पड़ा कि भोपाल में JOB लग गई है
प्रोजेक्ट पूरा हुआ तो भारत वापस आ गया। यहां उसको उसके लायक काम ही नहीं मिला। भारत में मेरिट होल्डर ब्राह्मण युवकों के लिए बेरोजगार होना कितनी शर्म की बात है, वह खुद ही जानते हैं। ऐसे में विदेश से लौटकर बेरोजगार हो जाना, इस दर्द को केवल मेरिट होल्डर ही समझ सकते हैं। आखिर झूठ बोलना पड़ा कि भोपाल में नौकरी लग गई है। भोपाल आ गया और यहां पर चोरी करना शुरू कर दिया, लेकिन कोई एक्सपीरियंस नहीं था इसलिए पकड़ा गया।
जीआरपी भोपाल के प्रभारी जहीर खान दावा करते हैं कि प्रांजल को ऑनलाइन गेमिंग की लत लग गई थी। इसलिए बर्बाद हो गया जबकि उसने चार मामलों में जो कुछ भी चोरी किया, वह सब कुछ पुलिस को दे दिया है। यदि उसे कोई लत लगी होती तो उसने पैसा खर्च कर दिया होता। पुलिस ने प्रांजल को कोर्ट में पेश किया और रिमांड पर ले लिया। पुलिस ने ऐसे फोटो जारी किया है मानो वह कोई कुख्यात डकैत हो।
क्योंकि सरकार के पास कोई योजना ही नहीं है
आगे क्या होगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन एक बात कंफर्म है कि लखनऊ के मेरिट होल्डर BTech इंजीनियर का वर्तमान बर्बाद हो चुका है। सरकार के पास न्यूनतम नंबर से पास होने वाले उम्मीदवारों को आरक्षण के माध्यम से सरकारी नौकरी देने की योजना है लेकिन मेरिट में आने वाले टैलेंटेड युवाओं का भविष्य सुरक्षित और संरक्षित करने की कोई योजना नहीं है। इस प्रकार के अपराधियों के पुनर्वास के लिए भी कोई योजना नहीं है। इस प्रकार के मामलों का रिकॉर्ड रखने के लिए कोई रजिस्टर ही नहीं है। नतीजा या तो टैलेंट भारत से बाहर जा रहा है, या फिर जेल में जा रहा है। कुछ ऐसे भी है जो MBA और इंजीनियरिंग जैसी डिग्री करने के बाद चाय की दुकान खोल रहे हैं, क्योंकि और कोई विकल्प ही नहीं बचा है। ऐसे युवाओं को सरकार बिजनेस के लिए लोन भी नहीं देती। योजना तो है लेकिन उसकी लिमिट बहुत कम है।

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