जबलपुर, 17 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी कितनी दबंगई के साथ और अधिकार पूर्वक की जाती है, यह मामला प्रमाणित करता है। कटनी में एक सीनियर इंजीनियर ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए भी ₹50000 की रिश्वत मांगी। साथ में धमकी भी दी गई यदि रिश्वत नहीं दिया तो हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करेंगे। तुमको फिर कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इंजीनियर साहब को लोकायुक्त पुलिस ने पकड़ लिया है। मामला दर्ज हो गया है। अब इंजीनियर साहब कोर्ट के चक्कर लगाएगी।
पहले 50000 मांगे, फिर 20000 में तैयार हो गए
लोकायुक्त जबलपुर डीएसपी नीतू त्रिपाठी ने बताया कि, शिकायतकर्ता जल संसाधन विभाग से रिटायर्ड चौकीदार पूरनलाल रजक 2024 में रिटायर हो गए थे। उनके वेतन एवं भत्ता का बकाया पेमेंट शेष था। डिपार्टमेंट ने भुगतान नहीं किया तो पूरनलाल हाई कोर्ट चले गए थे। हाई कोर्ट ने सभी बकाया भुगतान करने के आदेश दिए थे। जब हाई कोर्ट का आदेश पालन करवाने हेतु पूरनलाल रजक जल संसाधन विभाग में पहुंचे तो यहां पर प्रभारी कार्यपालन यंत्री व्ही.ए. सिद्दीकी ने भुगतान करने के बदले में ₹50000 रिश्वत की मांग की। रिश्वत नहीं मिलने पर हाई कोर्ट का आदेश होने के बावजूद बकाया भुगतान करने को तैयार नहीं थे। पूरनलाल ने इस बात की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त ऑफिस में पुलिस अधीक्षक के सामने की। पुलिस अधीक्षक ने शिकायत का सत्यापन करवाया और रिश्वत की मांग की एविडेंस कलेक्ट किए। जब पुष्टि हो गई की रिश्वत मांगी जा रही है तो ट्रैप दल का गठन किया गया।
कटनी के कार्यपालन यंत्री व्ही.ए. सिद्दीकी रिश्वत लेते गिरफ्तार
प्लानिंग के अनुसार पूरनलाल को केमिकल युक्त ₹20000 के नोट दिए गए। जैसे ही उन्होंने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, पूरनलाल ने इशारा कर दिया और मौके पर सिविल ड्रेस में मौजूद लोकायुक्त पुलिस की 12 सदस्यों की टीम ने प्रभारी कार्यपालन यंत्री व्ही.ए. सिद्दीकी को पकड़ लिया। केमिकल टेस्ट पॉजीटिव आने के बाद प्रभारी कार्यपालन यंत्री व्ही.ए. सिद्दीकी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

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