IFFCO Tokio से व्हीकल इंश्योरेंस से पहले हाई कोर्ट का यह फैसला जरुर पढ़िए

Updesh Awasthee
जबलपुर, 3 फरवरी 2026
: सामान्य तौर पर जब हम अपने मोटर वाहन के बीमा हेतु कंपनी के बारे में गंभीरता से विचार नहीं करते। व्हीकल खरीदते समय डीलर ने जिस कंपनी से बीमा करवा दिया, उसी को कंटिन्यू बनाए रखते हैं, परंतु अब समय आ गया है। कंपनी का चयन सोच समझकर किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट तक पहुंचा यह विवाद और फैसला, आपका नजरिया बदल देगा:- 

Ramdayal Carpenter and others vs. IFFCO Tokio General Insurance Company Limited

यह कहानी मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र की है। 4 मार्च, 2019 की शाम लगभग 7:00 बजे, शिवनारायण अपनी मोटरसाइकिल (MP42 MF 2391) पर अपनी पत्नी रतनबाई को पीछे बिठाकर (Pillion Rider) खिलचीपुर से अपने गाँव पाल्दिया (Paldiya) जा रहे थे। जब वे सांडावता-सारंगपुर रोड पर स्थित गाँव लीमा चौहान (Lima Chouhan) के पास देवमहाराज स्थान के समीप पहुँचे, तो शिवनारायण द्वारा मोटरसाइकिल को तेज और लापरवाही से चलाने के कारण संतुलन बिगड़ गया और एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में रतनबाई बाइक से नीचे गिर गईं और उन्हें गंभीर चोटें आईं।

पहले पत्नी और फिर लापरवाही से वाहन चलाने वाले पति की भी मृत्यु हो गई

दुर्घटना के बाद, रतनबाई को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। दूसरी ओर, वाहन के मालिक और चालक शिवनारायण भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए गोकुलदास अस्पताल (इंदौर) ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी भी मृत्यु हो गई।

बच्चों ने इंश्योरेंस क्लेम किया तो कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया

इस प्रकार, वाहन मालिक और उनकी पत्नी दोनों की मृत्यु हो गई। उनके बच्चों, रामदयाल कारपेंटर और अन्य (अपीलकर्ता), ने अपनी माँ रतनबाई की मृत्यु के लिए मोटर वाहन अधिनियम (MVA) की धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा पेश किया। कंपनी ने उनके दावे को यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि, महिला की मृत्यु, उसके अपने पति द्वारा लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई है, किसी दूसरे वहां से एक्सीडेंट नहीं हुआ। और फिर लापरवाही से वाहन चलाने वाला भी मर गया। इसलिए बीमार दवा नहीं बनता।

क्लेम ट्रिब्यूनल का प्रारंभिक फैसला (3 नवंबर, 2022) 

ट्रिब्यूनल ने मुआवजे की राशि 10,79,672 रुपये तो निर्धारित की, लेकिन भुगतान करने से मना कर दिया। ट्रिब्यूनल का तर्क था कि शिवनारायण (मालिक) की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी रतनबाई कानूनी रूप से वाहन की मालिक बन गईं, और चूँकि उनकी भी मृत्यु हो गई, तो उनके बच्चे अब मालिक हैं। इसलिए, रतनबाई 'थर्ड पार्टी' (Third Party) नहीं रहीं और बीमा कंपनी उत्तरदायी नहीं है।

उच्च न्यायालय का फैसला (29 जनवरी, 2026)

उच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के आदेश को पलट दिया और अपील स्वीकार कर ली। विद्वान न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी (इफको टोक्यो) को निर्धारित मुआवजा ब्याज सहित अपीलकर्ताओं को देना होगा।

फैसले के पीछे के कानूनी कारण

1. मृत्यु का समय: अदालत ने पाया कि रतनबाई की मृत्यु रास्ते में हुई थी, जबकि उनके पति शिवनारायण उस समय जीवित थे और अस्पताल में इलाज करा रहे थे। चूँकि मालिक जीवित था, इसलिए दुर्घटना के समय रतनबाई 'थर्ड पार्टी' थीं, न कि वाहन की मालिक।
2. स्वामित्व का हस्तांतरण (Section 50 MVA): अधिनियम की धारा 50 के अनुसार, मालिक की मृत्यु के बाद स्वामित्व ऑटोमेटेकली हस्तांतरित नहीं होता, बल्कि इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
3. धारा 155 का संरक्षण: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 155 स्पष्ट करती है कि बीमा प्रमाण पत्र जारी होने के बाद यदि बीमित व्यक्ति (मालिक) की मृत्यु हो जाती है, तो भी बीमा कंपनी का उत्तरदायित्व (Liability) समाप्त नहीं होता।
4. रिश्ते का प्रभाव: अदालत ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि केवल मालिक का रिश्तेदार होने से कोई व्यक्ति 'थर्ड पार्टी' होने का अधिकार नहीं खो देता।

न्यायालयी कार्यवाही और पक्ष

• न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ 
(High Court of Madhya Pradesh at Indore)।
• न्यायाधीश: माननीय न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी।
• अपीलकर्ता के वकील: श्री अभिषेक गिलके।
• बीमा कंपनी के वकील: श्री सुदर्शन पंडित और श्री राजेश पंडित। 

निष्कर्ष: IFFCO Tokio General Insurance Company Limited कंपनी किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर, इंश्योरेंस क्लेम का आसानी से भुगतान नहीं करती। उसकी पहली प्राथमिकता होती है कि किसी भी प्रकार से क्लेम को रिजेक्ट कर दिया जाए। इस मामले में उसने एक बहाना उठाया, जबकि इंश्योरेंस कंपनी मैनेजमेंट को इन नियमों के बारे में बेहतर जानकारी रही होगी।

क्या IFFCO Tokio सरकारी कंपनी है 

यह एक प्राइवेट सेक्टर की कंपनी है, जो जॉइंट वेंचर (संयुक्त उद्यम) के रूप में काम करती है। IFFCO-Tokio General Insurance Company Limited की स्थापना 2000 में हुई थी। इसमें Indian Farmers Fertiliser Co-operative Limited (IFFCO) की 51% हिस्सेदारी है। बाकी 49% हिस्सेदारी Tokio Marine Group (जापान की एक बड़ी इंश्योरेंस कंपनी) की है। IFFCO खुद एक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी है, जो किसानों द्वारा चलाई जाती है और फर्टिलाइजर से जुड़ी है। 

IFFCO सरकारी नहीं सहकारी

यह सरकारी नहीं है, बल्कि सहकारी (cooperative) क्षेत्र की है, हालांकि इसमें सरकार का कुछ प्रभाव या समर्थन हो सकता है, लेकिन यह सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी नहीं है।कंपनी का आधिकारिक दर्जा Non-Government Company (गैर-सरकारी कंपनी) है, जैसा कि MCA (Ministry of Corporate Affairs) रिकॉर्ड्स और IRDAI के तहत दर्ज है। यह पूरी तरह प्राइवेट जॉइंट वेंचर है, जिसमें विदेशी हिस्सेदारी भी शामिल है। 

यह मूल रूप से किसानों की कॉर्पोरेट सोसाइटी है। ऑटोमोबाइल सेक्टर से इसका कोई संबंध नहीं है।
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