RTI के तहत पति की सैलरी की जानकारी मिल सकती है या नहीं, हाई कोर्ट का नया फैसला

Updesh Awasthee
लीगल न्यूज डिपार्मेंट, 24 फरवरी 2026
: पति की पॉकेट पर पत्नी का अधिकार होता है, लेकिन क्या सूचना का अधिकार के तहत पत्नी, को उसके पति की सैलरी की जानकारी दी जा सकती है। यह मामला एक बार फिर हाई कोर्ट पहुंच गया। इस बार राजस्थान हाई कोर्ट ने बिल्कुल अलग फैसला दिया है। 

Can a Wife Obtain Her Husband’s Salary Details Under RTI? High Court Delivers New Ruling

श्रीमती कांता कुमावत के पति श्री ओम प्रकाश कुमावत पुलिस डिपार्टमेंट के कर्मचारी हैं। श्रीमती कांता कुमावत ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत, अपने पति की, जनवरी से मार्च 2024 तक की सैलरी स्लिप की मांग की। डिपार्टमेंट ने जानकारी देने से इनकार कर दिया और कारण बताया कि यह तीसरे पक्ष की निजी जानकारी है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इस जानकारी को तीसरे पक्ष की अनुमति के बिना सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। शासन के इस फैसले के खिलाफ श्रीमती कांता कुमावत ने अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट में याचिका फाइल कर दी। राजस्थान हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट का कहना है कि राज्य सरकार का फैसला सही है। किसी भी कर्मचारी की वेतन संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती चाहे उसकी अपनी पत्नी ने राइट टू इनफार्मेशन के तहत जानकारी मांगी हो। 

इस मामले में हाईकोर्ट ने, सुप्रीम कोर्ट के फैसले Girish Ramchandra Deshpande v. CIC का हवाला दिया। इस फैसले में कहा गया था कि नौकरी और सर्विस से जुड़ी जानकारियां मुख्य रूप से कर्मचारी और नियोक्ता के बीच का मामला होती हैं। 

मध्य प्रदेश और मद्रास हाई कोर्ट ने पत्नी के हक में फैसला दिया था

हालांकि, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि जब पति पत्नी के बीच विवाद हो, तो पत्नी को पति की आय जानने का अधिकार हो सकता है। इसी फैसले का हवाला देते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने भी माना कि मेंटेनेंस तय करने के लिए पति की सर्विस और वेतन से जुड़ी जानकारी दी जा सकती है।

सिर्फ इतना ही नहीं, यदि न्यायालय में मेंटेनेंस का विवाद चल रहा है तो पत्नी, अपने पति के आयकर रिटर्न की जानकारी भी मांग सकती है। 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मेंटेनेंस से जुड़े वैवाहिक मामलों में दोनों पक्षों को अपनी आय, संपत्ति, खर्च और देनदारियों की पूरी जानकारी हलफनामे के जरिए देनी चाहिए। इससे अदालत को उचित मेंटेनेंस तय करने में मदद मिलती है।

सर्वोच्च अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सर्विस, करियर, संपत्ति और देनदारियों से जुड़ी जानकारी आरटीआई के तहत निजी मानी जाती है। बिना जनहित के इसे साझा नहीं किया जा सकता। ऐसा करना निजता का उल्लंघन होगा। 
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!